मेरठ। वर्ष 1990 एवं 2000 के दशक में आवास विकास परिषद द्वारा परिषद द्वारा शास्त्री नगर आवास योजना संख्या-7 के अंतर्गत सेक्टर-1 से 13 तक आवासीय विकास किया गया था। तत्पश्चात वर्ष 1990 एवं 2000 के उक्त योजना के सेक्टर-1 से 11 सहित विकसित एवं आबाद क्षेत्रों को विधिवत रूप से नगर निगम मेरठ को हस्तांतरित कर दिया गया। आवास विकास परिषद द्वारा नगर निगम को हस्तांतरित कर दिए जाने के बाद किसी भी प्रकार की कार्रवाई का अधिकारी भी सीधे नगर निगम को हस्तांतरित स्वंत ही हो गया। जब आवास विकास परिषद के पास कोई अधिकार ही नहीं है तो फिर सेटबैक या दूसरे मामलों जिनमें अवैध निर्माण भी शामिल हैं आवास विकास परिषद प्रशासन किस नोटिस भेज रहा है। इस मामले को लेकर सीनियर आईएएस पी. गुरु प्रसाद प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को एक पत्र भाजपा के एक बड़े व्यापारी नेता सतीश कुमार गर्ग ने भेजा है। पत्र का संदर्भ लेने का आग्रह करते हुए इस पत्र में दी गई जानकारी की रौशनी में सेटबैक व दूसरे मामलों को लेकर नीति निर्धारित करने का आग्रह किया गया है। पत्र में कहा गया है कि योजना का विकास एवं हस्तांतरण के उपरान्त वर्ष 1970 के दशक (लगभग 1977 ) में परिषद द्वारा शास्त्री नगर आवास योजना संख्या-7 के अंतर्गत सेक्टर-1 से 13 तक आवासीय विकास किया गया था। तत्पश्चात वर्ष 1990 एवं 2000 के दशक में उक्त योजना के सेक्टर-1 से 11 सहित विकसित एवं आबाद क्षेत्रों को विधिवत रूप से नगर निगम मेरठ को हस्तांतरित कर दिया गया। अधिकार क्षेत्र का विधिक प्रश्न कि उक्त हस्तांतरण के फलस्वरूप संबंधित क्षेत्रों में संपत्ति कर वसूली, रख-रखाव एवं विकास कार्य, भवन उपविधियों का अनुपालन, अतिक्रमण नियंत्रण एवं नियमन से संबंधित समस्त वैधानिक अधिकार पूर्णत: नगर निगम मेरठ में निहित हैं, अत: परिषद द्वारा उक्त क्षेत्रों में पुन: हस्तक्षेप करना स्पष्ट रूप से अधिकार क्षेत्र से परे है।
36 साल में नगर निगम से एक नोटिस नहीं
दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिति (1990-2026) तक लगभग 36 वर्ष 1990 से वर्तमान वर्ष यानि 2026 तक लगभग तीन दशकों की अवधि में न तो नगर निगम मेरठ द्वारा किसी भवन को सेटबैक उल्लंघन के आधार पर अतिक्रमण घोषित किया गया, और न ही किसी प्रकार की विधिसम्मत कार्रवाई (ध्वस्तीकरण / दंडात्मक कार्रवाई) की गई। अत: यह स्थापित विधिक सिद्धांत है कि दीर्घकालिक प्रशासनिक मौन के पश्चात वर्तमान में की जा रही कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। परिषद द्वारा नोटिस जारी करने की अवैधता के दृष्टिगत परिषद द्वारा वर्ष 2026 में सेटबैक प्रभावित होने के आधार पर नोटिस जारी करनाविधिक प्रक्रिया का उल्लंघन है, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के प्रतिकूल है, तथा पूर्णत: अधिकार क्षेत्र से परे है।
बेहद गंभीर विषय
आवास आयुक्त को अवगत कराया गया है कि यह बेहद गंभीर विषय है। न्यायालय में भ्रमक तथ्यों का प्रस्तुतीकरण यह अत्यंत गंभीर विषय है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन अवमानना याचिका संख्या 877 / 2025 में परिषद की ओर से भ्रामक, अपूर्ण एवं तथ्यविहीन जानकारी प्रस्तुत की गई है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान विवादास्पद स्थिति उत्पन्न हुई है। विशेष रूप से यह तथ्य न्यायालय से छिपाया गया कि संबंधित क्षेत्र पूर्व में ही नगर निगम मेरठ को हस्तांतरित किए जा चुके हैं। परिषद द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों को भी अपने नियंत्रणाधीन दर्शाया गया। सेटबैक प्रभावित होने को कार्यवाही का आधार बनाना तथ्यात्मक एवं विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण है। इस प्रकार की प्रस्तुति न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता के प्रतिकूल है।
सेटबैक मूल विवाद का भाग नहीं
मूल विवाद का स्वरूप एवं सेटबैक प्रश्न की अतिरिक्तता – यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन उक्त अवमानना याचिका तथा संबंधित पक्षकारों / अधिवक्ताओं का मूल विवाद आवासीय भूखंडों के भू उपयोग परिवर्तन पर आधारित है। जबकि ‘सेटबैक प्रभावित होना मूल विवाद का का भाग नहीं है, बल्कि अतिरिक्त / गौण रूप से जोड़ा गया विषय है, जिसका उपयोग वर्तमान में अनावश्यक रूप से भवन स्वामियों के विरुद्ध कार्रवाई के औचित्य के रूप में किया जा रहा है। अत: सेटबैक के आधार पर व्यापक स्तर पर नोटिस जारी करना विवाद के मूल स्वरूप से भटकाव है। स्थिति का स्पष्ट निष्कर्ष कि हस्तांतरण के पश्चात अतिक्रमण / सेटबैक उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई का अधिकार केवल नगर निगम मेरठ को है । परिषद द्वारा की गई वर्तमान कार्रवाई पूर्णत: अवैध, अधिकार क्षेत्र 2804.21 परे एवं निरस्त किए जाने योग्य है।
निरस्त किए जाएं सेटबैक के नोटिस
पत्र में आवास आयुक्त से आग्रह किया गया है कि शास्त्री नगर योजना संख्या-7 के हस्तांतरित क्षेत्रों में जारी सभी सेटबैंक / अतिक्रमण नोटिस तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित अवमानना याचिका संख्या 877 / 2025 में वास्तविक एवं पूर्ण तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए पूर्व में दिए गए भ्रामक तथ्यों को संशोधित किया जाए। भू उपयोग परिवर्तन के मूल विवाद से असंबद्ध सेटबैक विषय को आधार बनाकर की जा रही कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। भविष्य में इस प्रकार की अधिकार क्षेत्र से परे किसी भी कार्रवाई से विरत रहने हेतु स्पष्ट प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं। इस प्रत्यावेदन पर यथाशीघ्र निर्णय लेकर अवगत कराने का कष्ट करें।
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