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तेल के दाम बढ़ाना सरकार की मजबूरी

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तेल के दाम बढ़ाना सरकार की मजबूरी
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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के चलते तेल के दामों में इजाफा किया गया है। जानकारों का कहना है कि यदि जंग ना रूकी तो पांच से छह रुपए तक इजाफा करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि आम आदमी पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसको इसे “महंगाई का नया झटका” बता रहा है। अन्य विपक्षी दलों खासकर आम आदमी पार्टी ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है।
भारत में तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने प्रमियम पेट्रोल (XP95, Power Petrol, Speed) की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। यह बदलाव 20 मार्च 2026 से पूरे देश में लागू हो गया है। सामान्य (रेगुलर) पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन इंडस्ट्रियल/बल्क डीजल में भारी ₹22 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है (₹87.67 से बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर)।
तेल की कीमतों पर वृद्धि को लेकर विपक्ष के हमलों से आहत सरकार ने सफाई दी है। कहा गया है कि ईरान-अमेरिका/इजरायल संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में उछाल ($100 के ऊपर) और सप्लाई चिंताएं। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होने से आयात महंगा पड़ रहा है।
प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले (हाई-परफॉर्मेंस कारें, स्पोर्ट्स बाइक, कुछ टैक्सी/डिलीवरी वाहन) की फ्यूल कॉस्ट बढ़ेगी। उदाहरण: दिल्ली में XP95 अब ~₹101-102 प्रति लीटर के आसपास। उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, पावर जेनरेशन और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ेगी। माल ढुलाई, बस/ट्रक किराया, बिजली उत्पादन महंगा → किराना, सब्जी, दूध जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
तेल के दामों में बढ़ौत्तरी की वजह से फूड डिलीवरी (Zomato/Swiggy) प्लेटफॉर्म फीस पहले से बढ़ चुकी है (तेल महंगे होने से डिलीवरी कॉस्ट बढ़ने के कारण)। अर्थव्यवस्था पर: अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो GDP ग्रोथ पर 0.1-0.2% प्रति $10 बैरल का असर, इन्फ्लेशन 0.2-0.3% बढ़ सकता है। आम आदमी पर अप्रत्यक्ष झटका — ट्रांसपोर्ट, बिजली बिल और सामान की कीमतों के रूप में। सरकार का कहना है कि रेगुलर फ्यूल स्थिर रखकर आम उपभोक्ता को राहत दी गई है।

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