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बैंक खाते में रिश्वत की रकम, जांच के आदेश

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बैंक खाते में रिश्वत की रकम, जांच के आदेश
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आरएफसी (सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, मेरठ सम्भाग) में कनिष्ठ सहायक पद पर तैनात कर्मी पर सिद्ध बाबा कन्सट्रक्सन विभागीय ठेकेदार से बैंक खाते में रिश्वत वसूलने का आरोप

मेरठ। ठेके के नाम पर चार लाख से ज्यादा की रिश्वत लेने वाले आरएफसी के कनिष्ठ सहायक के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। आरएफसी का अतिरिक्त कार्य देख रहे मेडा वीसी ने गाजियाबाद के डिप्टी आरएमओ को मामले की जांच सौंपी है। उन्हें एक सप्ताह में यह जांच पूरी करनी है। आरएफसी कार्यालय के आरएमओ निश्चल आनंद ने बताया कि इस संबंध में ठेकेदार के शिकायती पत्र के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर आरोपी कनिष्ठ लिपिक गौरव शर्मा का कहना है कि जांच के आदेश दिए गए हैं। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। विभाग के एक ठेकेदार का आरोप है कि सीएम योगी की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति को आरएफसी के एक कनिष्ठ लिपिक ने ही पलीता लगा डाला। इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ना कहे तो और क्या कहें, अब तक जो रिश्वत चोरी छिपे टेबल के नीचे से ली जाती थी आरएफसी कार्यालय में ठेके देने में वो रिश्वत अब खुलेआम और ऑन लाइन ली जा रही है। इतना ही नहीं जब इस मामले की शिकायत की गयी तो आरोपी को बचाने के लिए आरएफसी के जिन अफसरों से जांच कर कार्रवाई की उम्मीद थी, वो अफसर बचाने में लगे हैं। ठेकेदार का कहना है कि यहां तो सक्ष्म अधिकारी शिकायत पर उन्हें ही कठघरे में खड़ा करने पर तुले हैं। मामले की शिकायत करने वाले ने सक्षम अधिकारी पर आरोपी कनिष्ठ सहायक को बचाने व मामले में लीपापोती करने के लिए बेतुके सवाल किए जाने के आरोप तक लगाए हैं। यह है पूरा मामला यह पूरा मामला सिद्ध बाबा कन्सट्रक्सन विभागीय ठेकेदार से जुड़ा है। आरोप है कि गौरव शर्मा, कनिष्ठ सहायक द्वारा सिद्ध बाबा कन्सट्रक्सन विभागीय ठेकेदार से अपने कोटेक बैंक खाता संख्या – 2646275323 में दिनॉक – 29.09.2025 को उपरोक्त बैंक खाते में 02 लाख रूपये, दिनॉक 03.10.2025 को कोटेक महिन्द्रा बैंक खाते में 50 हजार रूपये, दिनॉक 13.10.2025 को उक्त खाते में 01 लाख रूपये तथा दिनॉक – 12.11.2025 को उक्त खाते में 01 लाख रूपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किये। यह रकम कंपनी के खाते से ट्रांसफर किए जाने की बात शिकायत करने वालों ने कही है। इस मामले की शिकायत रोहित कुमार निवासी ग्राम निडावली, पोस्ट अलीपुर मोरना, ब्लॉक हस्तिनापुर ने शासन के प्रमुख सचिव खाद्य रसद रणवीर प्रसाद, आयुक्त खाद्य तथा रसद जवाहर भवन, लखनऊ, संजय मीना , सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, मेरठ सम्भाग से की है। केवल शिकायत ही नहीं की गयी है बल्कि शिकायत के साथ रोहित कुमार ने बाकायदा नोटरी कराकर शपथ पत्र भी दाखिल किया है और कथित आरोपी गौरव शर्मा के उन बैंक खातों की जांच कराए जाने का आग्रह किया गया है जिनमें रिश्वत की रकम ऑन लाइन लिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। रोहित का आरोप है कि उसके द्वारा उपरोक्त दिनॉकों में ई मेल द्वारा आपको एवं अन्य उच्चाधिकारियों से की गयी। जिस पर सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी, मेरठ सम्भाग, मेरठ द्वारा शपथ पत्र मांगा गया जोकि उन्होंने 20 अगस्त को दस्ती रूप में कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर एवं ई मेल से 24 अगस्त को प्रेषित कर दिया। अजीब तर्क रोहित ने बताया कि उसके द्वारा की गयी शिकायतों की जांच कर बजाए आरोपी पर कार्रवाई करने के सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी, मेरठ सम्भाग ने शपथ पत्र को मूल रूप से यह कहकर वापिस कर दिया गया कि खरीदा गया स्टाम्प पेपर कैन्डिडेट के नाम से है, जबकि स्टाम्प पेपर स्वयं के नाम से होना चाहिए था, का कथन किया गया है जबकि मेरे निजी ज्ञान के अनुसार यदि कोई स्टाम्प पेपर कैन्डिडेट के नाम से खरीदकर नोटेरी कराकर केवल शिकायत की पृष्टि करायी जाती है तो वह अपने आप में पर्याप्त है, क्योंकि प्रदेश सरकार द्वारा किसी भी शासनादेश एवं विभागीय नियम के अन्तर्गत कही भी यह अंकित नहीं किया गया है कि शपथ पत्र कैन्डिडेट के नाम से नहीं हो सकता, केवल शासनादेश एवं विभागीय नियमों में शपथ पत्र देने की व्यवस्था है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ऑनलाइन जारी किये जाने वाले स्टाम्प पेपर पर धारा-04 के अन्तर्गत शपथ पत्र की व्यवस्था है, कैन्डिडेट का हिन्दी रूपान्तरण आवेदक ही होता है। शिकायकर्ता का आरोप है कि गौरव शर्मा द्वारा अपने कोटेक बैंक में प्राप्त रू0 4.5 लाख की धनराशि ठेकेदार को लाभ पहुचाने की नीयत से प्राप्त की गयी है । वर्तमान में भी टेण्डर प्रक्रिया जारी है। ई मेल आरएफसी कार्यालय मे उपलब्ध होने के बावजूद भी जानबूझकर उच्च स्तरों से पेपरलैस कार्यवाही करने के निर्देशों की अवमानना करते हुए मुझे रजिस्टर्ड डाक से पत्र प्रेषित किये जा रहे है ताकि इस गम्भीर मामले में लीपा पोती करना सम्भव हो सके। जांच के नाम पर खेल की आशंका बैंक खातों में कथित रूप से रिश्वत प्राप्त करने के इस मामले का खुलासा व शिकायत करने वाले ने आशंका जतायी है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आरोपी कनिष्ठ सहायक द्वारा प्राप्त की जा रही उत्कोच में कुछ अधिकारी भी भागीदार हों, क्योंकि इतने गम्भीर मामले में जिसमें बैंक खाते में रिश्वत प्राप्त करने के प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद भी आरोपी को हैण्डलिंग परिवहन जैसे महत्वपूर्ण पटल पर बनाये हुये है । इतना ही नहीं राजीव कुमार, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी शासनादेश संख्या-1/2018/117/पैतीस-2-2018-3/39(4)/18 दिनॉक-08.02.2018 की स्पष्ट अवमानना करते हुए बैंक खाते में उत्कोच प्राप्त करने जैसे अति गम्भीर प्रकरण में पत्राचार एवं अग्रिम कार्यवाही भी आरोपी के माध्यम से ही करायी जा रही है जोकि इनके उपरोक्त कार्यालय पत्रॉक से ही स्पष्ट हो रहा है। उक्त शासनादेश में दी गयी व्यवस्था के अनुपालन में स्वयं की जॉच करने वाले / स्वयं के सम्बन्ध में स्वंय पत्राचार करने वाले कनिष्ठ सहायक को तत्काल निलम्बित कर विभागीय कार्यवाही की जानी चाहिए वर्जन आरएमओ निश्चल आनंद ने बताया कि आरएफसी ने गाजियाबाद के डिप्टी आरएमओ को मामले की जांच सौंपी है। उन्हें एक सप्ताह में यह जांच पूरी करनी है। वहीं दूसरी ओर आरोपी कनिष्ठ लिपिक गौरव शर्मा का कहना है कि जांच के आदेश दिए गए हैं। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।  
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