मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट की समस्या के लिए दोषी कौन है अब इस पर बहस करने का वक्त नहीं, लेकिन यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ मेरठ से गए लोगों की नई दिल्ली में सिटिंग करा दी थी। सारा प्रारूप तय हो गया था। यहां तक भी तय हो गया कि जो पीआईएल दायर की जाएगी को अदालत में स्वीकृत करा दिया जाएगा। तोड़फोड़ की जो कार्रवाई सेंट्रल मार्केट के संदर्भ में चल रही है उस पर भी स्थगनादेश दिला दिया जाएगा फिर बीच में ऐसा क्या हुआ जो सब कुछ तय होने के बाद भी ये प्रयास परवान नहीं चढ़ पाए। वो कौन लोग थे जो बाईपास करडा. वाजपेयी से मिलने के लिए सीधे नई दिल्ली जा पहुंचे और फिर वहां भी कुछ ऐसी बातें की गयी जो नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा बाद में जिनके बांह पकड़ कर चले उन्होंने भी केवल कच्ची कालोनियों का दुखड़ा राेया। सेंट्रल मार्केट की समस्या की जो गाड़ी पटरी पर किसी प्रकार से लायी गयी थी उसको ही डिरेल कर दिया। इसके लिए और इस वक्त जो करो या मरो के हालात बन गए हैं या कहें एक दूसरे की छिछालेदर के हालात बना दिए गए हैं उसके लिए भी जिम्मेदार कौन है।
व्यापार संघ का नेताओं से ज्यादा अफसरों से सरोकार
व्यापार संघ के नाम पर मेरठ वालों ने ओपी खन्ना का कार्यकाल भी देखा है, उस दौरान मेरठ बंद होने पर जब सारे व्यापारी बेगमुपल चौराहे पर जमा हुआ करते थे और पुलिस प्रशासन के तब के टॉप अफसर खुद चलकर बेगमपुल ज्ञापन लेने के लिए आया करते थे और आज व्यापार संघ के नेताओं की स्थिति कि यदि बात करें तो ऐसी हो गयी है कि अफसर उन्हें इंतजार करा देते हैं। ऐसा कई बार देखा गया है कि जिले के बड़े अफसर से मिलने गए तो इंतजार करना पड़ा या बड़े अफसर ने अपने मातहत अफसर से मिलने को कह दिया। ओपी खन्ना के व्यापार संघ के कार्यकाल में शायद कभी ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली। इतना ही नहीं तब मेरठ बंद की जब कॉल दी जाती थी तो वो बंद अभूतपूर्व हुआ करता था। खोखा तक नहीं कोई खोलता था। अब तो हाल यह है कि व्यापार संघ के नेताओं को ही अपने इलाके में दुकानें बंद कराने के लिए कई बार ऐडियां रगड़नी पड़ जाती हैं। संयुक्त व्यापार संघ निर्वाचित 2 सितंबर के बंद को समर्थन देकर पीछे हटा गया, इसके पीछे वजह जो रही हो, लेकिन नवीन गुप्ता को लेकर गुस्से का इजहार किया जा रहा है। रही अजय गुप्ता की बात तो सुनने में आया है कि कल शाम यानि गुरूवार देर शाम उनका समर्थन मिल गया था, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं जब नवीन गुप्ता ही पीछे हट गए तो अजय गुप्ता ने यदि देर सवेरे समर्थन दिया भी हाेगा तो फिर वो क्यों आगे आएंगे। जिन व्यापारियों के नाम पर व्यापार संघ चलाए जा रहे हैं, ऐसा लगता है कि अब उन व्यापारियों को व्यापार संघ को अपनी अहमियत दिखाने का वक्त आ गया है। हालांकि बड़ा सवाल यह भी है कि दो सितंबर के बंद का अब क्या हश्र होगा। बंद सफल होगा या फ्लाप शो बना दिया जाएगा। बंद यदि फ्लाप शो बनाता भी है तो भी सवाल व्यापार संघ पर ही उठेंगे, क्योंकि तब यह सवाल जरूर पूछा जाएगा कि व्यापारियों की खुद को एक मात्र संस्था कहने वाले व्यापार संघ के नेता मेरठ के आम व्यापारियों के साथ हैं या फिर जिनसे उनके हित साधना होते हैं उन अफसरों के पाले में खड़े हैं। बंद के नाम पर राजनीतिक करने वालों को शायद शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट की समस्या नहीं नजर आ रही है। जिनके साथ यह सब गुजर रहा है वो किन हालात का सामना कर रहे हैं। इस वक्त उनका हाथ थाम कर संबल बनने की जरूरत थी ना कि हाथ झटक देने की।
सील वालों पर कार्रवाई तय
2 सितंबर के बंद को लेकर जो हालात बना दिए गए हैं उनमें अब इतना तो साफ हो गया कि जुलाई माह में सुप्रीमकोर्ट में हुई सुनवाई में जिन सील भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे, ऐसे हालातों में अब उनका बचना लगभग असंभव नजर आ रहा है। यह मान लिया जाना चाहिए कि उनका ध्वस्त होना तय है और यह भी मान लिया जाना चाहिए कि कहीं ना कहीं इसके लिए मेरठ बंद का हश्र और जिन्होंने इस पूरे मामले को लेकर पैरवी का बीड़ा उठाया था उनका दो कदम आगे और चार कदम पीछे होना जिम्मेदार माना जाएगा।
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