अब तक सौ से ज्यादा भारतीयों के गायब होने की खबर, बढ़ सकता है मौत का आंकड़ा, भारत की ओर पानी का सैलाब
नई दिल्ली। नेपाल -तिब्बत सीमा पर आई इस अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और भूस्खलन ने रसुवा, नुवाकोट, और धाडिंग जैसे जिलों में मौत और तबाही का ऐसा खौफनाक मंजर पैदा किया, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी। इस आपदा में अब तक सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 500 से अधिक लोग लापता हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में मलबे के साथ आया पानी का बहाव इतना तेज था कि कंक्रीट के बड़े-बड़े पुल और बस्तियां महज 30 सेकंड के भीतर नदी में समा गईं। जिलोंग और टिमुरे जैसे व्यस्त सीमावर्ती इलाकों और बाजारों में कीचड़, मलबे और पत्थरों की कई फीट ऊंची परत जम गई है। गाड़ियां और इमारतें मलबे के नीचे दफन हो चुकी हैं। इस जल प्रलय के समय इलाके में भारी संख्या में विदेशी पर्यटक मौजूद थे। वर्तमान में 291 विदेशी पर्यटकों (जिसमें लगभग 105 से 133 भारतीय शामिल हैं) का कुछ पता नहीं चल पा रहा है। मोबाइल टावर गिरने और सड़कें टूटने की वजह से प्रभावित इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया है, जिससे लोग अपने परिजनों की स्थिति जानने के लिए तड़प रहे हैं।
सैकड़ों के करने की आशंका
नेपाल में जल प्रलय से सैकडों के मरने की बात कही जा रही है। अब तक सौ से ज्यादा भारतीयों के गायब होने की खबर है। विनाशकारी जलप्रलय अब भारत की ओर तेजी से बढ़ रही है। अलर्ट जारी कर दिया गया है। नेपाल के रसुवा और भोटेकोशी नदी के पास अचानक यह जलप्रलाय आयी। वहां भूस्खलन की वजह से बड़े पैमाने पर तबाही मची और सैकड़ों लोगों के हताहत या लापता और मरने की आशंका जताई जा रही है। मौसम साफ था और अचानक बिना बारिश सैलाब आ गया। स्थानीय मौसम विभाग या मुख्यालय में कोई भारी बारिश दर्ज नहीं की गई थी, जिससे यह आपदा पूरी तरह अप्रत्याशित थी।
हिमस्खलन और नदी का रूक गया बहाव
रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास ऊपरी तिब्बत क्षेत्र में बड़ा हिमस्खलन (आइस एवलांच) हुआ और ल्हेंदे या भोटेकोशी नदी का मार्ग अवरुद्ध हो गया था।कुछ समय बाद पानी के दबाव से वह प्राकृतिक बर्फ़ और मिट्टी का बांध अचानक टूट गया, जिससे भारी मात्रा में पानी और चट्टानें एक साथ नीचे आ गईं और भयंकर सैलाब आ गया।तिब्बत क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर एक हल्का भूकंप (4.4 तीव्रता) भी दर्ज किया गया, जिसके कारण ऊपर पहाड़ों पर भूस्खलन और हिमस्खलन की स्थिति पैदा हुई।
हर तरफ तबाही का मंजर
चानक आए इस पानी के बहाव (फ्लैश फ्लड) से टिमुरे और स्याब्रूबेसी जैसे तटीय इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए, जहां पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग संपर्क से बाहर या लापता बताए गए। पुल, सड़कें, वाहन और कई जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाएं पानी के तेज बहाव और मलबे में समा गईं।
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