बसपा सुप्रीमो मायावती का सीएम योगी पर बड़ा हमला, बोलीं यूपी में बंद किए जा रहे हैं रहे स्कूलों को खोले प्रदेश की भाजपा सरकार
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया गया है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है कि यह जमीन पर उतरेगा या सिर्फ एक चुनावी वादा बनकर रह जाएगा। यूपी के सीएम योगी के एक लाख नौकरी देने के वादे पर बसपा सुप्रीमो ने बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो यूपी में स्कूल बंद किए जा रहे हैं। स्कूली शिक्षा से गरीब के बच्चों को वंचित किया जा रहा है। दूसरी ओर एक लाख नौकरी का योगी का वादा। बात कुछ हजम नहीं हो रही है। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आगामी चुनाव से पहले 6 महीने में 1 लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे ‘चुनावी कदम’ करार देते हुए रोजगार, 69,000 शिक्षक भर्ती, बंद पड़े स्कूलों और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को घेरा है।
घोषणा चुनावी वादे से ज्यादा कुछ नहीं
यूपी सरकार का 6 महीने में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का फैसला देर से उठाया गया चुनावी कदम लगता है। अगर ये नियुक्तियां पेपर लीक और भ्रष्टाचार से मुक्त होकर समय पर पूरी होती हैं, तभी यह युवाओं के हित में होगा और चुनावी छलावा साबित नहीं होगा। इसके साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर नई भर्ती की घोषणा का लोगों को बेसब्री से इंतजार है। 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी के चलते 6,800 अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति के लिए लगातार भूखे-प्यासे सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार को इन पीड़ित युवाओं के प्रति पूरी सहानुभूति दिखाते हुए तुरंत राहत देनी चाहिए, क्योंकि इसका वास्तविक समाधान सिर्फ सरकार ही कर सकती है।देश और प्रदेश में बदहाल स्कूली शिक्षा में सुधार की मांग बसपा लगातार उठाती रही है। ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के दबाव में सरकारी स्तर पर जो थोड़ी हलचल दिख रही है, यदि वह सही नीयत से शिक्षा सुधार के लिए है तो उचित होगा। जनहित में सरकार बंद किए गए लगभग 30 हजार सरकारी स्कूलों को बेहतर व्यवस्था के साथ तुरंत दोबारा सक्रिय करे।
महिलाओं को शोषण से बचाना हो प्राथमिकता
बुजुर्ग महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा कराने जैसी घोषणाएं काफी नहीं हैं। महिलाओं को केवल सुविधाएं देने के बजाय हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार और उत्पीड़न से बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार को महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सही नीयत और नीति के साथ काम करने की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर एक लाख नौकरी के वादे पर आलोचकों का यह भी तर्क है कि पूर्व की भर्तियों में पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे रहे हैं, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में निष्पक्ष भर्तियां कराना एक बड़ी चुनौती होगी।
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