जेनजी (Gen-Z) आंदोलन और युवा असंतोष के कारण भाजपा को लोकसभा चुनावों में भारी राजनीतिक नुकसान की आशंका
नई दिल्ली। जेनजी (Gen-Z) आंदोलन और युवा असंतोष के कारण भाजपा को लोकसभा चुनावों में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है, और आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी इसके गंभीर परिणाम दिखने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी को सीटों के नुकसान का सीधा अर्थ विपक्ष को बड़ी बढ़त। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी इसके गंभीर परिणाम दिखने की संभावना जताई जा रही है। पेपर लीक, बेरोजगारी, और जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए हालिया जेनजी विरोध प्रदर्शनों के कारण बने नैरेटिव ने भाजपा को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया। उत्तर प्रदेश जैसे मजबूत गढ़ में पार्टी की लोकसभा सीटें घटकर लगभग आधी रह गईं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारकों और विश्लेषकों ने भी यह माना है कि हालिया जेनजी आंदोलनों के बाद भाजपा युवाओं के बीच “नैरेटिव की लड़ाई” (Narrative War) हार गई, जिसके चलते पार्टी को अपने सोशल मीडिया प्रमुख तक को बदलना पड़ा। अमित मालवीय की बलि ले ली गयी।
यूपी विधानसभा पर साइड इफैक्ट
उत्तर प्रदेश में 18 से 29 वर्ष के जेनजी वोटर्स की संख्या कुल मतदाताओं की करीब 15% से 21% (लगभग 2.07 से 3.27 करोड़) है। यह युवा आबादी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर जेनजी वोटर्स का एक बड़ा हिस्सा इसी तरह भाजपा के खिलाफ वोट करता है, तो राज्य की 80 से 120 विधानसभा सीटों के परिणाम सीधे प्रभावित होंगे। 2022 के विधानसभा चुनाव में यूपी की 99 सीटें ऐसी थीं जहाँ हार-जीत का अंतर 1,000 से 10,000 वोटों का था। इनमें से 55 सीटें भाजपा ने जीती थीं। यदि जेनजी आंदोलन के कारण युवा वोट भाजपा से छिटकता है, तो इन 55 सीटों को दोबारा जीतना पार्टी के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। पार्टी ने उत्तर प्रदेश में युवाओं तक सीधे पहुंचने के लिए “जेन-जी चौपाल” और डिजिटल संवाद कार्यक्रम शुरू किए हैं। विधायकों और सांसदों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 18 से 25 साल के नए वोटर्स को सोशल मीडिया के जरिए 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था की याद दिलाएं।
सीएम योगी को लेकर अटकलें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पद से हटाने की इच्छा रखने की खबरें आधिकारिक रूप से केवल राजनीतिक अटकलें और विपक्ष के दावे हैं, हालांकि पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन और भविष्य के उत्तराधिकार को लेकर दोनों पक्षों के बीच वैचारिक और रणनीतिक खींचतान (Tug of War) जगजाहिर है। चाहे मोदी-शाह की कोई भी इच्छा हो, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में योगी आदित्यनाथ की विदाई करना भाजपा के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) वैचारिक रूप से योगी आदित्यनाथ को भाजपा और हिंदुत्व का सबसे मजबूत चेहरा मानता है। संघ किसी भी कीमत पर यूपी में योगी को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है और वह संकट के समय हमेशा उनके पीछे खड़ा नजर आता है।
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