मेरठ। गरीबों के रहने के नाम पर हर माह भारी भरकम रकम खर्च चलाए जा नगर निगम के 11 रैन बसेरों में से केवल तीन ही चल रहे हैं, बाकियों पर अफसरों के इशारे पर अरसे से ताले झूल रहे हैं। समाज के जिन कमजोर व मजलूम वर्ग के लोगों के रहने के नाम पर ये रेन बसेरे बनवाए गए हैं वो खुले आसमान के नीचे रातें गुजारने को मजबूर हैं। रेन बसेरों पर ताला है और जिनके लिए ये बनवाए गए हैं वो खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं नौबत यदि यहीं तक होती तो भी गनीमत थी, मुसीबत तो यह है कि रेन बसेरों के संचालन के लिए नगर निगम प्रशासन ने जिनको मुलाजमत यानि नौकरी दी है उनकी नियुक्ति की है अफसर उनके साथ भी अन्याय पर उतारू हैं। सरकारी महकमे का कायदा है कि जिसको नौकरी पर रखा जाता है उसको बारह महीने तीसों दिन काम दिया जाता है। यह शासन से प्रतिपादित नियम है और शासन से जो नियम प्रतिपादित होता है बनाया जाता है उसका पालन करना उत्तर प्रदेश सरकार के आधीन आने वाले सभी विभागों व उनके अफसरों यानि मासला नगर निगम से संबंधित है तो नगरायुक्त के लिए मानना अनिवार्य है, लेकिन योगी सरकार ने नौकरी को लेकर जो कायदे कानून तक किए हुए हैं जो हालात हैं उनको देखाकर लगता है कि नगर निगम के अफसरों पर वो लागू नहीं होते या फिर नगर निगम अफसर नहीं समझते कि योगी सरकार के द्वारा नौकरियों को लेकर जो कायदे कानून बनाए गए हैं उनका पालन कराया जाना जरूरी है, लेकिन ऐसा ही हो रहा है।
लोग खुले आसमान के नीचेे फुटपाथ या सार्वजनिक स्थानों पर रात गुजारने को मजबूर ना हों, इसके लिए शासन ने महानगर में रैन बसेरों की व्यवस्था की है। नगर निगम द्वारा महानगर में 11 रैनबसेरों के संचालन का दावा किया जाता है। इस मामले को लेकर आज जिलाधिकारी से मिले हिंद मजदूर सभा के विनेष विद्यार्थी ने अवगत कराया कि नगर निगम के प्रबन्धन में संचालित 11 रेन बसेरो में से, 3 रेन बसेरे एक्टिवेट हैं बाकी 8 रेन बसेरे बंद कर दिए गए हैं। उन ताले झूल रहे हैं। जिन लोगों को इन रैनबसेरों की दरकार है वो अपनी रातें खुले आसमान के नीचे गुजारने को मजबूर हैं।
भारतीय जनता पार्टी कंकरखेड़ा मंडल की उपाध्यक्ष एडवोकेट पूनम ने बताया कि नगर निगम ने गरीबों के लिए रात गुजारने का इकलौता सहारा जिन रैन बसेरों को बंद करा दिया है उनमें उनके वार्ड वार्ड नं 9 का रेन बसेरा भी शामिल है। एडवोकेट पूनम ने जिला प्रशासन की मार्फत सीएम योगी बताया है कि नगर निगम मेरठ के वार्ड नं 9 में, बहुत दयनीय स्थिति के लोग रहते हैं। सर्दी ही नहीं बल्कि गर्मी और बरसात में भी उन्हें आश्रय की जरूरत पड़ती है। रेन बसेरा जैसी व्यवस्था, निराश्रित लोगों को प्रश्रय देने के उद्देश्यों को फलीभूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई है, किंतु जनहित का निर्धारण, रेन बसेरा वर्कर्स सप्लायर एजेंसी के अनुसार किया जाना उचित नहीं है। हमारे संविधान में भी, भारत को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में जाना गया है, जनता का हित सर्वोपरि है। एडवोकेट पूनम का कहना है कि भाजपा कार्यकत्री होने के नाते उनका जनहित के साथ खड़े होना आवश्यक है। इसी के चलते उन्होंने निगम के वार्ड नं 9 कासमपुर कंकरखेड़ा के रैन बसेरे को शीघ्र अतिशीघ्र संचालित कराने का आग्रह किया है।
कहां जाए रेन बसेरे का स्टाफ
नगर निगम ने 11 में से आठ रेन बसेरे बंद करा दिए यह अन्याय तो उनके साथ है जिनके लिए रैन बसेरा ही इकलौता सहारा है, लेकिन इससे बड़ा अन्याय तो रेन बसेरों की देखभाल करने वाले स्टाफ के साथ निगम प्रशासन कर रहा है। हिंद मजदूर सभा के विनेष विद्यार्थी ने बताया कि रेन बसेरा वर्कर्स को अपने परिवार का पेट पालने का 12 माह में सिर्फ 5 माह तक रोज़गार देकर, 7 माह तक बेरोजगारी का दंश झेलने के विवश करना, मानवाधिकार उपेक्षा व निर्दयता की पराकाष्ठा है, 3 रेन बसेरा वर्कर्स को ही 12 माह सेवा में बरकरार रखना और 8 रेन बसेरा वर्कर्स को वंचित रखना, नैसर्गिक न्याय नहीं है।
इस अंधेरगर्दी के विरोध में सीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शासन की नितियों के तहत,जो रेन बसेरा वर्कर्स हैं, को ज्वाइनिंग तारीख का नियुक्त पत्र और 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम लिया जाता है, और साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जाता है,अतः अतिरिक्त कार्य का अतिरिक्त भुगतान और अवकाश दिवसों में लिए गए कार्यो का भी भुगतान दिया जाये। ज्ञापन पत्र में एडवोकेट पूनम व विनेष विद्यार्थी ने हस्ताक्षर किए हैं।
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