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मेरठ बुलियन एसो. महामंत्री बोले पीएम के साथ

मेरठ बुलियन एसो. महामंत्री बोले पीएम के साथ

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पांच अरब डॉलर के निवेश सहित कई समझौते
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मेरठ। मेरठ बुलियन ट्रेटर्स एसोसिएशन ने देश में आर्थिक संकट के चलते पीएम मोदी की अपील का स्वागत करते हुए राष्ट्रहित में साथ देने की बात कही है लेकिन साथ ही पीएम से मांग कि है कि रोजगार सुरक्षा के साथ निर्यात को नई उड़ान दी जाए। बुलियन एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने प्रेस से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए ‘आर्थिक देशभक्ति’ के पावन आह्वान का मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन हृदय से स्वागत करती है। देश पर जब भी संकट आया है, मेरठ सहित पूरे जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग ने राष्ट्र को सर्वोपरि माना है। आज भी हम पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह हमारा गौरव है कि जब-जब राष्ट्र नायकों ने आह्वान किया, भारत की माताओं-बहनों ने अपने गहने, यहाँ तक कि मंगलसूत्र तक राष्ट्रहित में समर्पित कर दिए। जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का मंत्र दिया, तो देशवासियों ने उनकी होली जलाकर स्वदेशी को अपनाया। ‘आर्थिक देशभक्ति’ की यह भावना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। आज का ज्वेलरी उद्योग भी उसी त्याग, समर्पण और अनुशासन के साथ सरकार के हर राष्ट्रहितकारी निर्णय में पूर्ण सहयोगी बनने के लिए संकल्पबद्ध है।

इसके साथ ही हमारा सरकार से करबद्ध निवेदन है कि इस सेक्टर से जुड़े करोड़ों परिवारों की जीविका को सुरक्षित रखते हुए एक दूरदर्शी रोडमैप बनाया जाए। हमारा आग्रह है कि कारीगर, दस्तकार, छोटे निर्माता, सप्लायर, थोक विक्रेता, खुदरा व्यापारी एवं बड़े उद्यमी – इस उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच सुनिश्चित किया जाए। इन सभी के लिए जॉब सिक्योरिटी के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा एवं बच्चों की शिक्षा हेतु विशेष पैकेज की घोषणा की जाए। कारीगरों के लिए ESI-PF जैसी योजनाओं का सरलीकरण करके उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

आज की वैश्विक चुनौती को हम अवसर में बदल सकते हैं। हमारे देश के घर-घर में पहले से ही अपार मात्रा में सोना एक सुरक्षित पूंजी के रूप में उपलब्ध है। यदि ‘घरेलू स्वर्ण सदुपयोग योजना’ के माध्यम से इस सोने का व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तो नए आयात की आवश्यकता स्वतः घटेगी। इससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचेगी और हमारे लाखों कुशल कारीगरों के हाथों में निरंतर काम बना रहेगा। इस पुनीत कार्य में पूरा उद्योग सरकार का हरसंभव सहयोग करने को तत्पर है।

विजय आनंद अग्रवाल ने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि भारतीय कारीगरों की विश्व-प्रसिद्ध कला को वैश्विक पहचान दिलाने के लिएजहाँ-जहाँ विशेष मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर हैं, वहाँ सरकारी मशीनरी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी एवं बायर-सेलर मीट का आयोजन किया जाए। छोटे ज्वैलर्स एवं निर्यातकों को इन प्रदर्शनियों में भाग लेने हेतु विशेष आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाए, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक बाजार मिल सके। कारीगरों के हुनर को प्रोत्साहन: पुराने गहनों की री-मॉडलिंग, रिपेयरिंग और एक्सचेंज को राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाया जाए। हॉलमार्किंग प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं कारीगर-हितैषी बनाया जाए। GST में व्यावहारिक राहत: रोजगार सुरक्षा एवं ‘मेक इन इंडिया’ को गति देने हेतु ज्वैलरी पर GST को 3% से घटाकर 0.5% करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार हो। मेकिंग चार्ज पर भी तदनुसार राहत दी जाए। नए क्षेत्रों में मार्गदर्शन: सोने-चांदी के विकल्प के रूप में उभर रही लैब-ग्रोन डायमंड एवं आर्टिफिशियल ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने हेतु सरकार नीतिगत मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रदान करे।

महज पीली धातु नहीं है सोना

विजय आनंद अग्रवाल का कहना है कि भारत में सोना केवल एक धातु नहीं है। यह हमारी बचत है, महिलाओं की सुरक्षा है, संस्कृति का प्रतीक है और करोड़ों परिवारों की आर्थिक रीढ़ है। उद्योग के विशेषज्ञों ने व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए ठोस सुझाव तैयार किए हैं, जिनके क्रियान्वयन से अनावश्यक आयात रुकेगा और रोजगार का सृजन होगा। उन्होंने कहा कि समस्त जेम्स-ज्वेलरी परिवार की ओर से यह विश्वास दिलाता हूँ कि ‘आर्थिक देशभक्ति’ के इस पुनीत अभियान में हम अपना सर्वस्व अर्पण करने को तैयार हैं। हमारा संकल्प अटूट है – देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत करेंगे और अपने कारीगर भाइयों का रोजगार भी सुरक्षित रखेंगे। एसोसिएशन इस संपूर्ण रोडमैप पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री जी को शीघ्र ही विस्तृत ज्ञापन सौंपेगी।

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