नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक संकट से निपटने के नाम पर देश को दी गयी राय से सोने के कारोबार के मिट्टी में मिल जाने की आशंका जतायी जा रही है। वहीं दूसरी ओर जो कुछ पीएम मोदी ने कहा है कि उससे सबसे ज्यादा सांसद में भारतीय जनता पार्टी का काेरवोटर माने जाने वाले सोने चांदी के कारोबारी सांसत में हैं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि भाजपा की माेदी सरकार उनके कारोबार पर ही प्रहार करने जा रही है। लेकिन ऐसा हो गया है। खांटी भाजपाई और संघी भी अब कहने लगे हैं कि अबकि बार अपनों पर मोदी का प्रहार। देश भर के लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ने की आशंका है। भारत में लगभग 4 से 5 लाख छोटे और बड़े स्वर्ण आभूषण विक्रेता हैं। एक साल तक सोने की खरीदारी रुकने से इस पूरे सेक्टर (जिसमें कारीगर, डिजाइनर और रिटेलर्स शामिल हैं) के व्यापार पर लगभग 30% से 50% तक की भारी गिरावट का खतरा है। पीएम ने जो कुछ कहा उसके निहितार्थ निकालने वालों का कहना है कि ऑटो मोबाइल सैक्टर पैदल हो जाएगा। पेट्रोल-डीजल और परिवहन: अपील में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) और सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है。 इससे पेट्रोल पंप मालिकों, निजी कैब चालकों, और ऑटो पार्ट्स डीलरों के दैनिक कारोबार में बड़ी मंदी आ सकती है।
किराना कारोबारियों का खत्म हो जाएगा मुनाफा
भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में से एक है। तेल की खपत कम करने से एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों, थोक विक्रेताओं (Wholesalers) और किराना व्यापारियों के मुनाफे में भारी कमी आएगी। हालांकि पीएम की अपील के बाद डेमेज को देखते हुए पूरी भाजपा डेमेज कंट्रोल में लग गयी है। साफ दी जा रही है कि यह अपील कोई अनिवार्य प्रतिबंध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में स्वेच्छा से अपनाई जाने वाली एक आपातकालीन आर्थिक अनुशासन व्यवस्था है। विपक्षी दलों और व्यापार संगठनों (जैसे Confederation of All India Traders – CAIT) का यह मानना है कि यदि लोग लंबे समय तक पूरी तरह से खरीदारी रोकते हैं, तो अर्थव्यवस्था का चक्र धीमा पड़ने से कई सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSMEs) के अस्तित्व पर सवालिया निशान लग सकता है। हालांकि, सरकार का मुख्य लक्ष्य देश से बाहर जाते हुए डॉलर को बचाकर रुपये को टूटने से बचाना है।
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