मेरठ। कैंट बोर्ड के नवागत ब्रिगेडियर ने चार्ज संभालने के साथ ही सबसे पहली चिंता छावनी क्षेत्र में किए जाने वाले अवैध कब्जों की वजह से बाजारों में लगने वाले जाम को लेकर जतायी थी। उन्होंने सीईओ कैंट के इस प्रकार के अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई को भी कहा था, लेकिन ब्रिगेडियर के निर्देश के बाद भी कैंट बोर्ड प्रशासन ने सड़क तक दुकानें सजा लेने वालों के खिलाफ कितनी शिद्दत से कार्रवाई की है इसका अंदाजा कैंट बोर्ड से चंद कदम की दूरी पर शिव चौक के समीप बंगला 210-बी के एक हिस्से में संचालित किए जा रहे चस्का फूड को देखकर लगाया जा सकता है।
कैंट बोर्ड प्रशासन के अफसर खासतौर से रेवेन्यू सेक्शन के अफसर भले ही कुछ भी दावे क्यों ना करें, लेकिन जमीनी हकीकत ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह की चिंता से कतई मेल नहीं खाती। क्योंकि यदि ब्रिगेडियर के निर्देश पर चस्ता फूड सरीखे दूसरे सदर समेत पूरे छावनी इलाके के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी होती तो शायद दूसरे व्यापारी जो दुकान का सामान ही सड़क पर रखकर बेचते हैं इस प्रकार की हिमाकत नहीं करते। यह हालात केवल शिव चौक या चस्का फूड तक ही महफूज नहीं है। कमोवेश पूरे छावनी क्षेत्र के बाजारों का कुछ ऐसा ही हाल है।
छावनी क्षेत्र के बाजारों में शिव चौक की हालात तो किसी से छिपी नहीं है। इसके अलावा सदर बाजार, सदर काली माई के आसपास की दुकानें, गंज बाजार, सब्जी मंड़ी में तो दुकान ही सड़क पर लाकर सजायी जाती हैं। लालकुर्ती और सबसे बुरा हाल पैठ एरिया का है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कैंट बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन के बगैर मर्जी के सड़क पर दुकान या अवैध कब्जा मुमकिन ही नहीं है। इसलिए इस प्रकार के अवैध कब्जों के लिए यदि कोई जिम्मेदार है तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ कैंट बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन का स्टाफ ही जिम्मेदार है।
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