मेरठ। पहली अप्रैल से सूबे की सरकार ने उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर का विकल्प चुनने की छूट दी है।सरकार ने इसकी अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। स्मार्ट मीटर अब आपकी मर्जी यानि उपभोक्ता की मर्जी पर निर्भर होंगे। इसकी मांग बिजली उपभोक्ता अरसे से कर रहे थे। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है और अब यह उपभोक्ताओं की सहमति पर निर्भर होगा कि स्मार्ट मीटर लगना है या नहीं। अब उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य है, लेकिन ‘प्रीपेड’ होना अनिवार्य नहीं है। उपभोक्ता प्रीपेड और पोस्टपेड के बीच विकल्प चुन सकते हैं।
अनिवार्यता खत्म सहमति जरूरी
1 अप्रैल 2026 को अधिसूचित CEA के नए आदेश के अनुसार, अब स्मार्ट मीटर तो लगेंगे, लेकिन वे प्रीपेड होने के लिए अनिवार्य नहीं होंगे। बिजली कंपनियों द्वारा बिना उपभोक्ता की सहमति के स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के मामले पर यूपी उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में कड़ा रुख अपनाया है। नियामक आयोग में मामला जाने के बाद, अब यह निर्देश दिया जा रहा है कि बिना सहमति के लगाए गए स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में बदला जाए।
बिजली कंपनियों को फटकार
यूपी नियामक आयोग (UPERC) ने स्मार्ट मीटर की स्थापना के दौरान उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क वसूलने वाली बिजली कंपनियों को फटकार लगाई है और 200 करोड़ रुपये का रिफंड देने का आदेश दिया है। स्मार्ट मीटर रिचार्ज करने के बाद भी बिजली न आने की शिकायतों पर परिषद ने बिजली कंपनियों पर रेगुलेशन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है।
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