विक्रम श्रीवास्तव
देहरादून उत्तराखंड के दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की पहल बेहद प्रभावी साबित हो रही है। राज्य सरकार की योजना को आईटीबीपी आगे बढ़ा रही है।
इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर उत्पादित सामग्री की खरीद बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। ग्राम विकास अपर सचिव अनुराधा पाल ने बताया कि इस पहल की शुरुआत स्थानीय पोल्ट्री और बकरी के मीट की खरीद से हुई थी, जिसे बाद में मछली, सब्जियों और फलों तक विस्तार दिया गया।
अब तक का आंकड़ा:
इस मॉडल के माध्यम से अब तक लगभग 10 करोड़ रुपये का व्यापार स्थानीय लोगों के जरिए हुआ है। इससे सीमांत गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। कई ग्रामीणों ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर दिए हैं और उनमें उत्साह देखा जा रहा है।
आगे की योजना
अनुराधा पाल ने बताया कि इस सफल मॉडल को और विस्तार देने के लिए एसएसबी और भारतीय सेना के साथ भी चर्चा चल रही है। साथ ही, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आईटीबीपी के डॉक्टरों और पैरामेडिक्स को उपलब्ध कराने पर सहमति बन गई है। राज्य सरकार इस दिशा में दवाइयां और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराएगी।
अपर सचिव अनुराधा पाल ने कहा,
“वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत जरूरी है। आईटीबीपी द्वारा राज्य सरकार की इस योजना को आगे बढ़ाना एक बड़ा और सार्थक कदम साबित हो रहा है।”
यह पहल न केवल सीमांत क्षेत्रों के निवासियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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