मल्लिकार्जुन खडगे, राहुल व प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव समेत तमाम दलों के नेता रहे मौजूद
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान आज (1 नवंबर 2026) विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली का गवाह बना है. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बुलाई गई इस रैली में विपक्ष के तमाम दिग्गज नेताओं ने हुंकार भरी है। मंच से केंद्र सरकार की नीतियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे हमले किए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से रामलीला मैदान तक खुली बस में मार्च निकालने के बाद गठबंधन के प्रमुख नेता मंच पर पहुंचे और भाजपा सरकार को घेरा। रैली के मंच पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव तथा कई बड़ी सामाजिक व राजनैतिक हस्तियां मौजूद हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकतंत्र और जनता के वोट के अधिकार की रक्षा की बात करते हुए कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के वोट के अधिकार को बचाने की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी और मतदाता सूचियों में मनमानी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भीड़ को लेकर दावे
कांग्रेस और सहयोगी दलों ने इस महारैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने की उम्मीद जताई थी और दावा किया है कि दिल्ली के चारों तरफ से लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। दिल्ली पुलिस के खुफिया इनपुट के अनुसार लगभग 70,000 लोगों के आने की संभावना जताई गई थी। वहीं, सुरक्षा मानकों के तहत रामलीला मैदान की कुल क्षमता कुर्सियां और बैरिकेडिंग लगाने के बाद लगभग 50,000 लोगों की आंकी गई है, जिसके चलते मैदान पूरी तरह खचाखच भरा नजर आ रहा है।
बॉर्डर पर भारी नाकेबंदी
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डरों पर जानबूझकर भारी बैरिकेडिंग की गई है ताकि गाड़ियों की रफ्तार धीमी की जा सके और कार्यकर्ता समय पर रैली में न पहुंच पाएं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 4,000 से अधिक जवानों और ड्रोन कैमरों की तैनाती की गई है। पुलिस का रुख है कि केवल तय नियमों के तहत ही गाड़ियों और बसों की चेकिंग की जा रही है, किसी को अवैध रूप से रोका नहीं जा रहा है, बल्कि सुरक्षा और जाम की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रूट डायवर्जन किए गए हैं।
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