हरित प्रदेश निर्माण समिति ने की अलग राज्य की पैरवी
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पदाधिकारी जनांदोलन चलाने के लिए गांव-गांव जगाएंगे अलख, हरित प्रदेश निर्माण समिति ने की अलग राज्य की पैरवी
मेरठ। हरित प्रदेश निर्माण समिति को अलग राज्य से कम कुछ भी मंजूर नहीं। अलग राज्य के लिए निर्माण समिति के तमाम बड़े पदाधिकारी पैदल यात्रा करेंगे और गांव-गांव अलग राज्य के लिए अलख जाएंगे। हरित प्रदेश निर्माण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक समिति के संयोजक प्रदेश के बड़े कारोबारी मनीष प्रताप सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ता बदर महमूद के आवास, बनी सरायमें आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस का बड़ा जाट चेहरा माने जाने वाले चौधरी यशपाल सिंह ने की। बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समुचित विकास के लिए अलग हरित प्रदेश के गठन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश आर्थिक, औद्योगिक एवं कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद अपनी अनेक बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। एक अलग प्रदेश का गठन प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने, विकास कार्यों में तेजी लाने तथा क्षेत्र की जनता की समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वेस्ट के सभी जिलों में बैठक
बैठक में निर्णय लिया गया कि हरित प्रदेश निर्माण समिति बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में बैठकें आयोजित कर हरित प्रदेश की आवश्यकता और उसके संभावित लाभों के प्रति जनजागरण अभियान चलाएगी। इस अभियान के अंतर्गत व्यापारियों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, पत्रकारों, उद्योगपतियों, किसानों तथा समाज के अन्य प्रबुद्ध वर्गों से संवाद स्थापित किया जाएगा, ताकि अलग प्रदेश के गठन के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन तैयार किया जा सके। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हरित प्रदेश का मुद्दा केवल राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, उद्योगों के विस्तार, बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं और आम जनता के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
ये रहे मौजूद
बैठक में वेस्ट यूपी का बड़ा सिख चेहरा डॉ. कर्मेंद्र सिंह, एस. पी. नैन, कांग्रेस का ब्राह्मण चेहरा सुरेंद्र शर्मा, सीनियर एडवोकेट अनिल जंगाला, कोमल सिंह, युवा अधिवक्ता शक्ति सिंह, सरबजीत गुम्मन, राकेश रस्तोगी, सलीम सिद्दीकी, मोइनुद्दीन एवं फैज़ महमूद ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए अलग हरित प्रदेश के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया और इस मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने पर बल दिया।
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