मेरठ। बैकों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से वित्त मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश(पंजी.) के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारियों और उद्यमियों का एक शिष्टमंडल आज डीएम से मिला। संगठन ने वित्त मंत्री को संबोधित एक आठ सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया। इस मांग पत्र में बैंकों द्वारा व्यापारियों से की जा रही विभिन्न प्रकार की वित्तीय वसूलियों और जटिल नियमों के सरलीकरण की पुरजोर मांग की गई है।
प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले व्यापारी और उद्यमी आज बैंकों के अव्यावहारिक नियमों और मनमाने शुल्कों से बेहद त्रस्त हैं। आयकर नियमों के तहत नगद लेनदेन की सीमा 20,000/- तय है, लेकिन बैंकों के अवकाश के कारण व्यापार ठप हो जाता है, जिससे सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान होता है। इसलिए सभी सरकारी बैंकों को सातों दिन खोला जाना बेहद जरूरी है।
ये हैं मांगे
ज्ञापन में व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने चेक डिसऑनर चार्ज पर रोक की मांग करते हुए कहा कि चेक बाउंस होने की स्थिति में भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारी का कोई दोष नहीं होता, फिर भी बैंक दोनों पक्षों से चार्ज वसूलते हैं। यह पूरी तरह गलत है, यह चार्ज सिर्फ चेक जारी करने वाले पर ही लगना चाहिए। कैश हैंडलिंग व मेंटेनेंस चार्ज की समाप्त किया जाए। चालू खाते पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता, इसलिए मिनिमम बैलेंस न होने पर लगाई जाने वाली पेनेल्टी तुरंत समाप्त हो। साथ ही, सुचारू रूप से चल रहे लोन या लिमिट अकाउंट से हर साल रिन्यूअल और प्रॉपर्टी रिवैल्युएशन के नाम पर की जाने वाली अवैध वसूली पर रोक लगे। मात्र 3 महीने ब्याज न मिलने या तकनीकी कारणों से खाते को एनपीए घोषित कर दिया जाता है, जिससे चलता हुआ व्यापार नष्ट हो जाता है। बैंकों को मुकदमों से बचाने और व्यापार को जिंदा रखने के लिए इस समय सीमा को बढ़ाकर 6 महीने किया जाए। केवाईसी की सीमा 10 वर्ष हो। बैंकों द्वारा बार-बार केवाईसी के नाम पर व्यापारियों को बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
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