Home मेरठ विहिप का मुस्लिम से मेहंदी ना लगवाने का फरमान
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विहिप का मुस्लिम से मेहंदी ना लगवाने का फरमान

विहिप का मुस्लिम से मेहंदी ना लगवाने का फरमान

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विहिप का मुस्लिम से मेहंदी ना लगवाने का फरमान
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मेरठ। विश्व हिन्दू परिषद व उसके अनुशांगिक संगठनों ने मुस्लिमों से मेहंदी ना लगवाने को कहा है। विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा वाहिनी, मेरठ महानगर द्वारा करवाचौथ के पर्व के अवसर पर आज महानगर के विभिन्न स्थानों पर मेहंदी शिविरों का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य हिंदू त्योहारों पर हिंदू समाज की बाजारों में करवाचौथ की खरीदारी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। ऐसे अवसर पर दुर्गा वाहिनी ने बहनों से आह्वान किया कि वे अपने त्योहारों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और समाज के लोगों के साथ जोड़कर मनाएं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दुर्गा वाहिनी ने ‘हिंदू त्योहार, हिंदू से ही मेहंदी लगवाएं का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। महानगर सह संयोजिका मीनाक्षी पांडेय ने कहा कि त्योहारों के माध्यम से समाज की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए। इसी संकल्प के साथ आयोजित मेहंदी शिविरों में दुर्गा वाहिनी की बहनों ने स्वयं स्थानीय माताओं और बहनों के हाथों पर सुंदर मेहंदी लगाई। इस पहल के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि हमारी परंपराएं केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से समाज में सहयोग, सद्भाव, स्वावलंबन और रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकते हैं। हिंदू त्योहारों पर हिंदू समाज की महिलाओं और स्थानीय कारीगरों को प्राथमिकता देने से उनके कौशल को पहचान मिलती है तथा आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जनजागरण एवं सामाजिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।

भारी संख्या में पहुंचीं महिलाएं

मेहंदी शिविरों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर उत्साहपूर्वक मेहंदी लगवाई। उपस्थित महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अच्छा माध्यम बताया। दुर्गा वाहिनी ने समस्त हिंदू समाज से अपील की कि वे करवाचौथ सहित अपने सभी शुभ अवसरों, व्रत-त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में स्थानीय लोगों, हिंदू कारीगरों तथा हिंदू समाज की महिलाओं को प्रोत्साहित करें। मीनाक्षी पांडेय ने कहा कि अपने त्योहारों पर अपने समाज के लोगों को अवसर देना, उनकी प्रतिभा को सम्मान देना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सहयोग करना हम सभी का सामाजिक दायित्व है।
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