रैली की वजह से पूरा महानगर में जबरदस्त जाम, दर्जनों एम्बुलेंस जाम में फंसी तड़पते रहे मरीज
मेरठ। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में रैली निकालनी की अनुमति देने वाले अफसर बाकि के इंतजाम करना भूल गए, नतीजा यह हुआ कि पूरे शहर में इस आयोजन की वजह से जाम लग गया। जाम में फंसे लोग सिस्टम को कोसते रहे। दर्जनों एम्बुलेंस भी इस जाम में फंस गई। एम्बुलेंस में पड़े मरीज तड़पते रहे, लेकिन रैली की अनुमति देने वाला सिस्टम नींद में नजर आया। आज जो कुछ रैली के दौरान हुआ उसको लेकर शहर के तमाम लोगों ने इसको लेकर सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। बड़े व्यापारी नेता विपुल सिंहल और आरटीआई एक्टिविस्ट डा. संदीप पहल ने भी इसके लिए जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि किसी महापुरुष को श्रद्धांजलि देने के नाम पर आम नागरिकों को घंटों तक जाम में फँसाकर उनके जरूरी काम बाधित करना और प्रदूषण की समस्या को गंभीर बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
इस रैली की वजह से आज पुलिस लाइन रोड से लेकर नेहरू रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, मेघदूत चौराहा, अंबेडकर चौराहा और सहकारी बैंक चौराहे तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। फूलबाग कॉलोनी चौराहे से लेकर इवज चौराहा और बच्चा पार्क तक यातायात प्रभावित रहा। जाम में फंसे लोगों ने अफसरों को कॉल लगायी लेकिन रिसीव नहीं हुई। वहीं दूसरी ओर विपुल सिंहल ने बताया कि कचहरी, जिलाधिकारी आवास और अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों के आसपास स्थित शहर के वीआईपी क्षेत्र में रैली के आयोजन के कारण सड़कों पर लंबे समय तक यातायात बाधित रहा। कार्यालयों, अस्पतालों और अन्य जरूरी कामों के लिए निकले लोग घंटों जाम में फँसे रहे। वाहनों की लंबी कतारों के कारण ईंधन की बर्बादी हुई और प्रदूषण बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति यह थी कि यातायात खुलवाने में जुटे पुलिसकर्मियों को भी अपने मुंह और नाक पर कपड़ा बाँधना पड़ा।
नेता जी को ये कैसे श्रद्धांजलि
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश को साहस, अनुशासन, त्याग और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया था। उनका प्रसिद्ध नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा” देशवासियों में संघर्ष और समर्पण की भावना जगाने वाला था। लेकिन आज उनके नाम पर ऐसा आयोजन करना, जिससे आम जनता का समय बर्बाद हो, मरीजों और जरूरतमंदों की राह बाधित हो तथा शहर की हवा और अधिक प्रदूषित हो, क्या उनके आदर्शों के अनुरूप है? देशभक्ति का अर्थ जनता को परेशानी देना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। महापुरुषों की स्मृति में होने वाले कार्यक्रम समाज में जागरूकता, अनुशासन और सकारात्मक संदेश फैलाने के माध्यम बनने चाहिए, न कि आम नागरिकों के लिए मुसीबत।
परमिशन के साथ समझे जिम्मेदारी भी
प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। किसी भी रैली या जुलूस की अनुमति देते समय उसके मार्ग, समय, यातायात के दबाव और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए। ऐसे आयोजन के लिए ऐसा समय और मार्ग निर्धारित हो, जिससे कार्यालय जाने वाले लोगों, मरीजों, एंबुलेंस तथा अन्य आवश्यक सेवाओं को बाधा न पहुँचे। यातायात के वैकल्पिक मार्गों और उचित प्रबंधन की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। प्रशासन से अपील है कि वह केवल अनुमति देने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित न रखे, बल्कि जनता की सुविधा और स्वास्थ्य की रक्षा भी सुनिश्चित करे। मेरठ की सड़कों पर आम आदमी का समय, स्वास्थ्य और अधिकार किसी भी आयोजन से कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। नेताजी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके नाम पर होने वाले कार्यक्रम उनके आदर्शों के अनुरूप हों और जनता को गर्व के साथ-साथ राहत भी दें। शहर को जाम और प्रदूषण की भेंट चढ़ाकर देशभक्ति का संदेश नहीं दिया जा सकता। आयोजन हों, देशभक्ति भी हो—लेकिन जनता की परेशानी की कीमत पर नहीं!
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