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भरोसा क्यों नहीं कर पा रहे नेताओं की बातों पर

भरोसा क्यों नहीं कर पा रहे नेताओं की बातों पर

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भरोसा क्यों नहीं कर पा रहे नेताओं की बातों पर
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यूपी के विधानसभा चुनाव या फिर वजह है कुछ और जिसकी पर्दादारी है, अब तक काट रहे थे शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के नाम से कन्नी

मेरठ। शासत्रीनगर और सेंट्रल मार्केट की धरने पर बैठी महिलाओं के आंसू जो जिनका दिल नहीं पसीजा और जो इस मुद्दे से पूरी तरह से कमर किए नजर आते थे, उन्हें एकाएक शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट वालों का दर्द महसूस होने लगा है। लोग कह रहे हैं कि अब तक कहां थे हुजूर.. बड़ी कर दी मेहरबां आते-आते.. जब सब कुछ उजाड़ गया। सांसद अरुण गोविल, भाजपा के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभारी डा. साेमेन्द्र तोमर, विधायक अमित अग्रवाल, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, संगठन के महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तौगी सर्किट हाउस में मीडिया से रूबरू थे। उन्होंने जो बातें कहीं उस पर लगता है कि पीड़ित और प्रभावितों को अभी भरोसा नहीं हो पा रहा है। वहीं दूसरी ओर इस पीसी में भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के विनित अग्रवाल शारदा या संयुक्त व्यापार संघ से कोई मौजूद नहीं था। शास्त्रीनगर के पीड़ितों में से भी कोई मौजूद नहीं था। वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं द्वारा बताया गया कि नगर निगम से बात हो गयी है। पुनर्वास किया जाएगा। अफसरों से बात हो गयी है आदि-आदि। सबसे बड़ी हैरानी की बात तो यह है कि जिनके लिए यह पीसी बुलायी गयी थी ना तो उनको विश्वास में लिया गया और ना ही किसी प्रकार का ऑफर मसलन क्या करने जा रहे हैं वो किसी को बताया ना ही शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के पीड़ितों में से कोई मौजूद था। लोगों का साफ कहना है कि राहत और पुनर्वास तो की बातें तो कहीं पर निगाहे कहीं पर निशाना वाली बात हैं। अगले साल फरवरी मार्च में यूपी विधानसभा के चुनाव आसन्न है। उससे पहले डेमेज कंट्रोल जरूरी है। मेरठ में सात विधानसभा सीटें हैं, जो हालात यूपी के बने हुए हैं उसके चलते एक-एक सीट बेहद कीमती है फिर दूसरी बात यह कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है।

पीड़ितों को नहीं नेताओं पर यकीन

भाजपाइयों की प्रेस कांफ्रेस को लेकर शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के प्रकरण से सीधे जुड़े लोगों के ख्यालत की यदि बात की जाए तो संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन के वाट्सअप ग्रुप में जुड़े विवेक राणा सवाल करते हैं कि क्या किसी प्रेस वाले ने पूछा कि सेंट्रल मार्केट वालों के लिए तो ये योजना लाए हैं आप लोग बाकी शहर के लोग, हॉस्पिटल वाले मंडप वाले उनके लिए कौन सा लॉलीपॉप है..एस्ट्रॉलाजर अमित वर्मा का मानना है कि कुछ नहीं मिलेगा इनको चुनाव का डर सता रहा है आज जो ये कर रहे हैं अगर काम्पाऊडिग करते कई करोड़ राजस्व आता ओर ओर व्यापारी सडक पर ना होते ओर खुल कर लोग समर्थन करते । कुछ भी नहीं होगा अब। आशीष चौधरी का मानना है कि यह चुनावी स्टंट है। वो कमेंट करते हैं कि आज सारे झूठे एक जगह इक्कठे हो गए और मीडिया को बुलाकर झूठ बोल दिया। 2 दिन पहले योगी जी आए थे तो इनको सांप सूंघ गया था। अपनी नाकामी छुपाकर मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने की कोशिश कर रहे है। रोहित सैनी का मानना है कि नेता उन्हें लॉलीपॉप थमा रहे हैं। सौरभ चाहते हैं कि सेंट्रल मार्केट को ही रेग्यूलराइज किया जाए। दीपक रस्तौगी लिखते हैं कि पुनर्वास योजना बकवास है इतने चुनाव हो जाएंगे इन्हें चुनाव का डर सता रहा है। मेरठ व्यापार मंडल के अध्यक्ष शैकी वर्मा सवाल उठाते हैं कि इसमें पहली बात तो कोई कागजी वादा नहीं है कि कागज पर लिख कर दिया हो दूसरी बात यह कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है कि अभी सामान उठाओ और रख लो यह प्रक्रिया चंद महीनों से लेकर कहीं सालों तक चल सकती है। राजेश गर्ग लिखते हैं कि Re survey पहले सेंट्रल मार्केट का करवाना था अब देर हो गई है अब चारों जोन की पूरी सर्वे रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजो, अब डर लगा अपनी सीट जाने का। जब पूरे मेरठ का नाम आया तो हवा निकल गई सबकी और बुल्डोजर चला लो अब।आशीष कपूर लिखते हैं कि जब तक शास्त्री नगर की बात थी तब कोई प्रतिनिधि नहीं आया कोई आश्वासन नही, जब बात 16725 की आयी तो पुनर्वास की बात की जा रही है।she कास्मेटिक वाले लिखते हैं कि न तो व्यापारियों से इन्होंने कोई संवाद किया, न कोई मीटिंग करी कि व्यापारियों को क्या चाहिए, खुद से निर्णय लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी..मनीपाल सिंह मलिक ने लिखा है कि फर्जी झूठी कॉन्फ्रेंस नेताओं का काम है पब्लिक को मूर्ख बनाने का कुछ नहीं देंगे बस सिर्फ इलेक्शन जीतने का प्रोपगंडा है।

भाजपा नेता कहिन..

सर्किट हाउस में सांसद अरुण गोविल, राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, कैंट विधायक अमित अग्रवाल आदि ने प्रेसवार्ता की। कहा कि शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को बहुत कम किराए पर जगह उपलब्ध कराई जाएगी। सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर के व्यापारियों व निवासियों के लिए प्रदेश सरकार नई पुनर्वास नीति ला रही है। लगभग 650 व्यापारियों को आबादी के बीच में लीज पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन्होंने कहा कि एमएलसी स्नातक व शिक्षक चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण पूरी नीति की घोषणा नहीं जी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम सम्मान करते हैं। एमडीए द्वारा फिर से 16700 जो अवैध संपत्तियों की लिस्ट कही जा रही है उसको री-सर्वे कराया जाएगा। नई दुकानों के लिए व्यापारियों से नाममात्र का किराया लिया जाएगा। व्यापारियों व आम लोगों के पुनर्वास का कार्य सरकार करेगी। आगे कहा कि रंगोली मंडप शास्त्रीनगर के पास में जो कम्युनिटी सेंटर है वहां हम एक मल्टीलेवल बिल्डिंग तैयार कराएंगे। इसका टेंडर हो चुका है। इस बहुमंजिला इमारत में सेंट्रल मार्केट के पीड़ित दुकानदारों को लीज और बेहद कम किराए पर दुकानों का आबंटन होगा। जिन व्यापारी की जितनी एरिया की दुकान टूटी है उसे उतनी ही बड़ी दुकान इस बहुमंजिला इमारत में अलॉट की जाएगी। यह लगभग दो मंजिल का भवन होगा। कम्युनिटी सेंटर को तीसरी मंजिल पर शिफ्ट करेंगी। शुरूआत की दो मंजिल पर पूरा मार्केट बनेगा इसमें दुकानें होंगी। कहा कि इसमें लगभग 6 महीने का समय अभी लग सकता है।
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