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मेरठ

मेडा में ना वीसी ना सचिव मेडा भाजपाई एक्टिवेट

मेडा में ना वीसी ना सचिव मेडा भाजपाई एक्टिवेट

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Neither a VC nor a Secretary at MEDA; instead, BJP members are active.
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प्राधिकरण वीसी मेडिकल लीव पर और सचिव अर्पित गुप्ता को शासन ने चलता कर दिया, पोस्टिंग नहीं वेटिंग

मेरठ। सुनियोजित विकास प्राधिकरण के साथ की सुप्रीमकोर्ट में पोल खुलने के बाद मेडा के अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। सवालों का सामना करने के लिए कोई भी अफसर सामने आने को तैयार नहीं है। हालात कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अदालत में बेपर्दा होने के बाद शासन ने सचिव अर्पित गुप्ता को हटा दिया है। उन्हें कोई नई पोस्टिंग भी नहीं दी गयी है। वेटिंग में रखा गया है वहीं दूसरी ओर उपाध्यक्ष भी मेडिकल लीव पर चले गए हैं। वहीं दूसरी ओर सुप्रीमकोर्ट की ओर से पूरे महानगर यानि प्राधिकरण के चारों जोन में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के आदेश के बाद अब तक सुप्तावस्था में पड़े भाजपाई भी रातों रात एक्टिवेट हो गए। याद रहे कि जिन अवैध कालोनियों और निर्माणों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है उनमें से 90 फीसदी का भाजपाई कनेक्शन है। ऐसे में भाजपाई एक्टिवेट ना हो तो क्या हो। आज आनन फानन में भाजपा की तरफ से एक विशेष सर्किट हाउस में कुछ देर बाद होने जा रही है। इसमें सांसद, विधायक, एमएलसी, मेयर सहित तमाम बड़े नेता पहुंच रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले पर कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं। जिस कालोनी में भाजपाई नहीं वो कालोनी तो काटी जा रही नहीं सकती। भाजपाई हैं तो कालोनी मुमकिन हैं वर्ना तो बुल्डोजर की कार्रवाई तय है। भाजपाइयों की केवल अवैध कालोनियां ही नहीं है, शहर की घनी आबादी वाले इलाकों में जहां गली कूचों से ई रिक्शा तक निकलना दुश्वार होता है ऐसी इलाकों में पुराने मकानों को खरीद कर वहां भी सौ-सौ दुकानों के कांप्लैक्स बना दिए हैं। जो अफसर शिकायतों के बाद भी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई से भागते थे वो अब एकाएक एक्टिव हो गए हैं। पीएम शर्मा रोड, खैरनगर, जत्ती बाड़ा, लिसाड़ीगेट, जाटवगेट सरीखे तमाम ऐसे इलाके हैं जहां पुराने मकानों में कांप्लैक्स बनाए जाने की शिकायतों के बाद भी प्राधिकरण अफसर ना केवल नींद में रहे, बल्कि पीएल शर्मा रोड के किंग बेकरी कांप्लैक्स और नेहरू रोड के होटल सरीखे निर्माणों को सही ठहराने में पूरी ताकल तक झोंक दी। बाईपास स्थित होटल वन फेरर प्राधिकरण अफसरों के भ्रष्टाचार का जीता जागता सबूत है। ये कांप्लैक्स भाजपा के तमाम व्यापारी नेताओं के हैं। ये भाजपाई नेता किसी परिचय के मोहताज नहीं है। अब इनके निर्माणों को बचाने की जुगत की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जब से प्राधिकरण के चारों जोन में अवैध निर्माणाें काे ध्वस्त करने का फरमान जारी किया है और जोन ए में अवैध निर्माणों का जो स्टेटस सामने आया है उसके बाद रातों रात भाजपाई एक्टिवेट हो गए। गढ. रोड, दिल्ली रोड, हापुड़ रोड, बिजली बंबा बाईपास, मवाना रोड, खासतौर से बागपत रोड, रोहटा रोड, सरधना रोड, बाईपास, परतापुर सर्किल में जितनी भी अवैध कालोनियां हैं सुनने में तो यहां तक आया है कि यो भाजपाइयों काटी हैं या उनका सीधा कनेक्शन है। इसके अलावा शहर की तमाम तंग गलियों में जितने भी अवैध कांप्लैक्स पुराने घरों में बना दिए गए हैं उन सभी के पीछें भी भाजपाई बताए जा रहे हैं।

भाजपाइयों के एकाएक एक्टिवेट होने की वजह

सप्रीमकोर्ट के आदेश के नाम पर किसी भी कार्रवाई में लाचारी जाते वाले संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष भी आनन-फानन में सामने आए गए। बड़ा सवाल यही कि जब 661/1 सेंट्रल मार्केट को ध्वस्त कर वहां को कारोबारियों को सड़क पर लाए जाने का काम किया जा रहा था उस वक्त क्यों चुप रहे। उस कार्रवाई के बाद दावा किया गया था कि बस यही आखिरी है, इसके बाद किसी अन्य को ईंट भी नहीं छूने दी जाएगी। ईंट छूना तो दूर की बात आशियना छत से छिन जाने की नौबत आ गयी है। जो नेता अब तक मौन व्रत धारण किए थे उन्हें एकाएक मिशन 2027 याद आ गया है। उन्हें पता है कि यदि मेरठ के या केवल शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का व्यापारी ही रूठ गया तो इसका असर विधानसभा की सीटों पर पड़ना तय है। इसीलिए माहौल बनाने का प्रयास है किसी भी तरह मार्च अप्रैल निकल जाए, चुनाव संपन्न हो जाएं। यह ठीक वैसा ही होता प्रतीत होता है जब रैपिड रेल के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी और सीएम योगी को मेरठ आना था और सेंट्रल मार्केट वालों ने बंद का एलान कर दिया था। ठीक वैसा ही मंजर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है कि किसी प्रकार विधानसभा चुनाव निपट जाए। जो सब कुछ जानते हैं वो खुलकर अब बोलने लगे हैं कि मदद तो बहाना है विधानसभा चुनाव तक किसी तरह व्यापारियों को चुप कराना है..

मेडा में अफरा-तफरी का माहौल

प्राधिकरण में अफरा-तफरी का माहौल। सूत्रों की मानें तो नए अफसरों को हालात से निपटने के लिए भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में मेरठ के अवैध निर्माणों की सूची और उल्देपुर की अवैध कॉलोनी के मामले में शासन ने मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के सचिव अर्पित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। अभी उनकी जगह नए सचिव की तैनाती नहीं की गई है। सचिव को हटाए जाने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में मेरठ के अवैध निर्माणों की सूची दाखिल की जानी थी। सूची दाखिल न होने और उल्देपुर की अवैध कॉलोनी के मामले में शासन का पक्ष ठीक से नहीं रखा जा सका। अवैध निर्माणों को लेकर जब अर्पित गुप्ता से सवाल किया गया तो उनके पास इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है। यह जानकारी शासन स्तर तक पहुंची। इसके बाद शासन की ओर से अर्पित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया गया।

 

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