लगभग 200 युवाओं ने की सहभागिता, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सेवा का लिया संकल्प
मथुरा। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा नगरी स्थित परिणय गार्डन में युवा संवाद कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मथुरा जनपद के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में सक्रिय लगभग 200 युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता श्री अजीत प्रसाद महापात्र (अखिल भारतीय गौ सेवा संयोजक) तथा कार्यक्रम अध्यक्ष श्रीमती शिप्रा राठी (रोजगार दीदी एवं सचिव, खजानी वेलफेयर सोसायटी) द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से कार्यक्रम का विधिवत आरंभ हुआ। कार्यक्रम की प्रस्ताविकी शोभित जी द्वारा प्रस्तुत की गई।
50 वर्षों से निरंतर राष्ट्रीय विमर्श
युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अजीत प्रसाद महापात्र ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, समर्पण और राष्ट्रभाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लगभग 150 वर्षों से वंदे मातरम् का विषय निरंतर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा रहा है। बंग-भंग आंदोलन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता से जुड़ा विषय था। उस समय देशवासियों ने विभाजन की भावना को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत हमारे लिए केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी माता है। भारत की महान परंपरा सदैव समस्त विश्व के कल्याण की भावना से प्रेरित रही है। आज भारत विश्व में एक महत्वपूर्ण और संतुलनकारी शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है और अनेक देशों में भारत के प्रति सम्मान बढ़ा है। महापात्र ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा केवल ‘मैं और मेरा परिवार’ तक सीमित न रहें, बल्कि अपने गांव, जिला, प्रदेश, देश, समाज और सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की चिंता करें। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार समाज सेवा में योगदान देना चाहिए।
RSS प्रेरित करने वाला संगठन
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ युवाओं को संगठित कर राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करने वाला संगठन है। संघ की शाखा युवाओं में अनुशासन, संगठन, सेवा और राष्ट्रभाव का संस्कार विकसित करती है। संघ की विचारधारा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करती है। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्व को समझकर राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करे, तो विश्व में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। मुख्य वक्ता के उद्बोधन के उपरांत प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उसकी कार्यपद्धति, शाखा, सामाजिक सेवा एवं राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका से संबंधित विभिन्न जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। इस दौरान कार्तिकेय, शोभित, सोनिया कुंतल, रजत रावत आदि युवाओं ने प्रश्न रखकर संवाद को सार्थक एवं जीवंत बनाया। मुख्य वक्ता श्री अजीत प्रसाद महापात्र ने युवाओं के प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा उन्हें राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रेरित किया। प्रश्नोत्तर सत्र ने कार्यक्रम को एकतरफा उद्बोधन के स्थान पर युवाओं की सक्रिय सहभागिता वाला एक सार्थक संवाद बना दिया।
“युवा संवाद समस्याओं के समाधान का माध्यम
कार्यक्रम अध्यक्ष शिप्रा राठी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “युवा संवाद समस्याओं के समाधान का एक सशक्त माध्यम है।” उन्होंने कहा कि पहले युवा अपने परिवार और समाज के बीच अधिक समय बिताता था, जिसके कारण परिवार के सदस्यों तथा समाज के लोगों के साथ उसका निरंतर संवाद बना रहता था। इसी संवाद के माध्यम से उसकी अनेक समस्याओं का समाधान सहज रूप से हो जाता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा मोबाइल और डिजिटल माध्यमों में अधिक व्यस्त रहने लगा है, जिसके कारण परिवार और समाज के साथ उसका प्रत्यक्ष संवाद कम होता जा रहा है। संवादहीनता अनेक समस्याओं को जन्म देती है।
श्रीमती राठी ने युवाओं को तकनीक के सकारात्मक उपयोग का संदेश देते हुए कहा कि “हम टेक्नोलॉजी के नहीं हैं, बल्कि टेक्नोलॉजी हमारे लिए है।” तकनीक का उपयोग हमारे जीवन को सरल, बेहतर और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए होना चाहिए, न कि उसे हमारे जीवन और संबंधों पर हावी होने देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल और तकनीक का संतुलित एवं सार्थक उपयोग करते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र के साथ अपने जीवंत संवाद और संबंधों को मजबूत करें।
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