महापौर का कैंप कार्यालय, नगर निगम प्राधिकरण व मेडिकल समेत तमाम थानों में भी पानी गया भर
मेरठ। बीती रात से हाे रही झमाझम बारिश ने शहर के कई इलाकों मे नहर सरीखा मंजर बना दिया। कई इलाकों चार-चार फुट पानी भर गया। लिसाड़ी रोड और टीपीनगर मलियाना के कई इलाकों में ऐसा लगा मानों यहां के लोग वाहनों के बजाए माेटर वोट से आते जाते हों। शास्त्रीनगर जैसा इलाका भी झमाझम बारिश में पानी के भराव से नहीं बचा सका। तेज बारिश की वजह से शास्त्रीनगर और माधवपुरम के समेत शहर के कई इलाकों में घरों तक में पानी भर गया। महानगर की कई पॉश समझी जाने वाली कालोनियों में भी पानी भर गया। लेकिन बारिश के चलते सबसे बुरा हाल शहर घंटाघर इलाके का हुआ। यहां नगर निगम कार्यालय के सामने पानी भर गया। हमेशा की तरह आज भी नगर निगम और मेडा सरीखे कैंपस भी पानी भरने से ना बच सके। पानी भर जाने की वजह से स्टाफ को आने जाने में काफी परेशानी हुई। जिनके पास गाड़ियां हैं उन्हें भी पानी से होकर गुजरना पड़ा, क्योंकि पूरे परिसर में कक्ष से पहले गेट तक पानी भरा हुआ था। हालत यह भी कि बारिश के भरे पानी में चलने से ना तो अफसर बच सके ना ही स्टाफ यानि कर्मचारी। शहर के दूसरे इलाकों में तो और भी बुरा हुआ। घंटाघर डफरिन के सामने से होकर खैरनगर पहुंचने वाली गली में भी पानी भर गया। यहां कई गलियों में घरों में बारिश का पानी आ गया। पटेल नगर में भी पानी भर गया। गोला कुंआ और नौचंदी की ओर जाने वाली रोड भी पानी से लबालब थी। शहर की पुरानी विकासपुरी कालोनी में भी जबरदस्त पानी भरा हुआ था। सबसे बुरा हाल हापुड़ रोड इलाके का था। हापुड़ रोड की बात करें तो यहां चार थाना क्षेत्र पड़ते हैं पहला लिसाड़ीगेट, फिर ब्रह्मपुरी और नौचंदी तथा लोहिया नगर। इन सभी में बारिश के पानी की समस्या से जूझ रहे तमाम लोगों ने थानों पर फोन करने शुरू कर दिए। हालांकि यह काम पुलिस का नहीं है, लेकिन जो कॉल कर रहे थे वो चाहते थे कि पुलिस वाले ही जलभराव की बात नगर निगम के अफसरों तक पहुंचाए। शहर के दूसरे पुराने इलाकों की यदि बात की जाए तो लाला का बाजार और जाटव गेट इलाका भी आज हुई बारिश के दौरान जलभराव से नहीं बच सका। खैरनगर में भी पानी भरा हुआ था। इनके इतर टीपीनगर का मलियाना व लल्लपुरा इलाका एक बार फिर बारिश के पानी की चपेट में आ गया। गढ रोड मेडिकल के सटी बस्तियों में भी बारिश का पानी भर गया। दिल्ली रोड मोहकमपुर इलाके में भी जबरदस्त जलभराव हुआ।
मेयर कैंप कार्यालय भी पानी-पानी
और तो और सूरजकुंड स्थित महापौर का कैंप कार्यालय भी बारिश के पानी से होने वाले जलभराव से नहीं बच सका। जिस तरह से नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण कार्यालय में पानी भरा था, वैसा ही हाल कैंप कार्यालय का था। कांवड़ यात्रा के चलते प्रशासन ने अवकाश की घोषणा की हुई है, इसलिए बच्चे तो स्कूलों में नहीं गए, लेकिन तमाम ऐसे स्कूलों को लेकर सूचना मिली जिनमें बताया कि जबरदस्त पानी भर गया।
थाने भी पानी पानी
बारिश के मौसम से पुलिस वालों का भी डर लगता है। थाना नौचंंदी, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी और लोहिया नगर के कैंपस में भी पानी भर गया। थाना मेडिकल के परिसर में भी बारिश का पानी जमा हो गया। पुलिस वालों को बारिश के पानी से होकर आना जाना पड़ रहा था। यह कोई प्हली बार नहीं हुआ है। शहर और देहात के तमाम ऐसे थाने हैं जिनमें झमाझम बारिश के नाम से वहां डयूटी करने वाले पुलिस वालों का हलक सूखता है।
सबसे बुरा हाल मेडिकल का
एलएलआरएम मेडिकल कालेज और सरदार बल्लभ भाई पटेल अस्पताल में एक बार फिर झमाझम बारिश का पानी भर गया। पानी भर जाने की वजह से ओपीडी में पहुंचे मरीज और तिमारदार परेशान रहे। दरअसल बारिश तो बीती रात से हो रही है और जब सुबह ओपीडी लगाने का वक्त था उस वक्त भी पानी पड़ रहा था, पानी तो ओपीडी लगने से पहले ही भर गया था। ओपीडी के अलावा सुपरस्पेशिलिटी ब्लॉक और इमरजैंसी के बाहर भी पानी भरा हुआ था। डॉक्टर और कर्मचारी पैरों में पॉलिथीन बांधकर अस्पताल पहुंचे, और स्ट्रेचर व व्हीलचेयर ले जाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। टीबी ओपीडी (नंबर 16), इमरजेंसी वार्ड और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के अंदर तक पानी पहुंच गया। एलएलआरएम मेडिकल परिसर में पानी की निकासी का सिस्टम खराब होने से हर बारिश में यही हाल होता है। लेकिन जब बारिश थम जाती है तब इसको सही कराने की जरूरत नहीं समझी जाती है। केवल बारिश में जब जलभराव होता है तभी इसकी याद आती है।
जलभराव की वजह अवैध कब्जे
महानगर में जब भी बारिश होती है कई ऐसे इलाके हैं जहां जलभराव होता है। इस बात को सिस्टम चलाने वाले भी जानते हैं और जिन प्रभावशाली लोगों ने इस प्रकार से नाले नालियों को कब्जा लिया है वो भी जानते हैं। ईव्ज चौराहा स्थित हरि लक्ष्मी लोक कांप्लैक्स में बेसमेंट वाली दुकानों में पानी भर जाता है, इसकी वजह वहां मौजूद नाले पर अवैध कब्जा। यह तो केवल वानगी भर है। जलभराव के लिए नगर निगम को कोसने वालों को कभी भी नाले नालियों पर किए गए कब्जे नजर नहीं आते। जब भी इसके खिलाफ नगर निगम अभियान चलाता है तो वहां अफसरों का घेराव करने को नेता और व्यापारी पहुंच जाते हैं। जब तक नाले नालियां अवैध कब्जों से मुक्त नहीं कराए जाएंगे तब तक महानगर को जलभराव की मुसीबत से मुक्त नहीं कराया जा सकता। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि नाले नालों की समुचित सफाई कराए जाने की वजह से बारिश का पानी तेजी से निकल रहा है।
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