मेरठ। ईडी के शिकंजे में फंसे वेस्ट यूपी में भाजपा का कदावर चेहरा माने जाने वाले धर्मेंद्र भारद्वाज को शहर विधानसभा से पार्टी का टिकट मांगने वालों में शुमार किया जाता है। हालांकि महावीर यूनिवर्सिटी समेत रूड़की की दो अन्य ऐसे ही शिक्षण संस्थानों मेंं ईडी की कार्रवाई के बाद धर्मेंद्र भारद्वाज की शहर विधानसभा सीट से दावेदारी पर कितना असर पड़ेगा यह कहना अभी तो जल्दबाजी होगा, लेकिन भाजपा एमएलसी के शिक्षण संस्थानों पर ईडी का खामियाजा उठाना तय माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर धर्मेंद्र भारद्वाज और इनसे पहले कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा व पूर्व एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल सरीखों पर केंद्रीय जांच ऐजेंसियों की कार्रवाई से यह भी साफ हो गया है कि भाजपा में होना इस बात की कतई गारंटी नहीं कि कुछ भी करोगे और सरकार चुप रहेगी। कम से कम भाजपा में तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। खासतौर से सूबे की योगी सरकार में तो भले ही कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों ना हो यदि कोई गलत है तो फिर किसी भी प्रकार की रियायत नहीं। केवल प्रदेश सरकार ही नहीं भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भी अपनी ऐजेंसियों को इसको लेकर पूरी छूट दी हुई लगती है। क्योंकि ईडी और सीबीआई सरीखी जांच ऐजेंसियां सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती हैं जिसके मुखिया अमित शाह हैं।
विरोधी खेमा सक्रिय
एमएलसी धर्मेंंद्र भारद्धाज के ठिकानों पर जैसे ही ईडी के छापों की जानकारी बाहर आयी संगठन में उनके विरोधी माने जाने वाले भी एकाएक सक्रिय हो गए। यह खबर जैसे ही वायरल हुई भाजपा में शहर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी करने वालों के करीबी भी सक्रिय हो गए। कुछ तो मीडिया से ज्यादा सक्रिय नजर आए और पल-पल की अपडेट लेने व देने पर उतर आए। वहीं दूसरी ओर पिछले कुछ समय से मेरठी भाजपाई जांच ऐजेंसियों के रडार हैं। सीबीआई और ईडी सरीखी जांच ऐजेंसियां मेरठी भाजपाइयों को लेकर अधिक सक्रिय नजर आते हैं। जहां तक मेरठी भाजपाइयों की बात है तो जांच ऐजेंसियों के शिकंजे में तो पहले भी कई भाजपाई फंस चुके हैं, लेकिन यदि ताजे मामलों भाजपा के जो नेता जांचों में फंसे हुए हैं उनमें पूर्व एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल, डा. सतीश शर्मा और अब एमएलसी धर्मेंद्र भारद्धाज का नाम भी शुमार कर लिया गया है।
एलएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज की जहां तक संगठन में राजनीतिक पकड़ की बात है तो पार्टी सूत्रों की मानें तो उनकी गिनती संगठन के उन नेताओं में की जाती है जो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सरीखे संगठन के प्रमुख चेहरों के करीबियों समझे जाते हैं, लेकिन ईडी की कार्रवाई ने यह भी साफ कर दिया कि भले ही आप संगठन में किसी भी बड़े मंत्री व संगठन के पदाधिकारी के करीबी रहे हों, लेकिन यदि कुछ भी लगत किया या गलत तरीके से संपत्ति अर्जित की तो कार्रवाई तय है। भले इसमें देर क्यों ना हो जाए, लेकिन संगठन और सरकार ऐसे लोगों को खुद ही रडार पर ले लेते हैं। कुछ समय पहले हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में संगठन ने धर्मेंद्र भारद्वाज को बड़ा दायित्व सौंपा था। बताया जाता है कि राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान धर्मेंद्र भारद्वाज दो माह तक पश्चिम बंगाल में डेरा डाले रहे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान केवल धर्मेंद्र भारद्वाज ही नहीं उनके करीब दो सौ समर्थक भी वहां डेरा डाले रहे। पश्चिमी बंगाल में दो माह तक पसीना बहाने वाले धर्मेंद्र भारद्वाज का शहर विधानसभा सीट से टिकट तय माना जा रहा था, लेकिन ईडी की कार्रवाई के बाद शहर विधानसभा सीट से भाजपा से टिकट मागने वाले दूसरे दावेदारों के चेहरे खिले हुए हैं।
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