Home मेरठ पोस्टर इन दिनों सोसायटी में चर्चा का विषय
मेरठ

पोस्टर इन दिनों सोसायटी में चर्चा का विषय

पोस्टर इन दिनों सोसायटी में चर्चा का विषय

Share
पोस्टर इन दिनों सोसायटी में चर्चा का विषय
Share
New Dehi /गाजियाबाद। राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एनक्लेव सोसायटी के फ्लैट नंबर एसपी-2/201 के बाहर लगाए गए ‘पलायन और ‘फ्लैट बिकाऊ है संबंधी पोस्टर इन दिनों सोसायटी में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पोस्टरों में दावा किया गया है कि परिवार कथित रूप से भय और असुरक्षा के माहौल के कारण अपना फ्लैट बेचने और सोसायटी छोड़ने को मजबूर है। पोस्टर लगाने वाले निवासी गौरव बंसल का कहना है कि उन्होंने गाली-गलौज, धमकी और सुरक्षा संबंधी मामलों को लेकर कई बार प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से परिवार में असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ती गई। गौरव बंसल के अनुसार, विरोध दर्ज कराने और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने फ्लैट के बाहर ‘पलायन के पोस्टर लगाए हैं। पोस्टरों में यह संदेश दिया गया है कि जब शिकायतों के बावजूद सुरक्षा और न्याय नहीं मिलता, तो व्यक्ति अपने घर तक को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाता है। सोसायटी में पोस्टर लगने के बाद निवासियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था, शिकायतों के निस्तारण और कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि यदि किसी निवासी को अपने घर के बाहर इस प्रकार के पोस्टर लगाने पड़ें, तो यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

पलायन विरोध का प्रतीक

गौरव बंसल का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराना और संबंधित अधिकारियों का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करना है। ‘जब शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न हो और परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो पलायन विरोध का एक प्रतीक बन जाता है। ‘
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

9 + 1 =

Related Articles

स्कूल में 13 टीचर एडमिशन महज 14 बच्चों का

स्कूल में 13 टीचर एडमिशन महज 14 बच्चों का

राजस्थान के कांवड़ियों की बिगड़ी हालत मौत

राजस्थान के कांवड़ियों की बिगड़ी हालत मौत

तो क्या कांवड़ यात्रा को थी दहलाने की तैयारी

तो क्या कांवड़ यात्रा को थी दहलाने की तैयारी

खुद ही गिराने को मजबूर हैं अपने प्रतिष्ठान

खुद ही गिराने को मजबूर हैं अपने प्रतिष्ठान