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बातचीत के बजाए आग उगल रहे ईरानी फौजी अफसर

बातचीत के बजाए आग उगल रहे ईरानी फौजी अफसर

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बातचीत के बजाए आग उगल रहे ईरानी फौजी अफसर
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नई दिल्ली/तेहरान। बातचीत के सवाल पर अमेरिका और ईरान के बीच बात अभी बनती नजर नहीं आ रही है। हालांकि जहां तक अमेरिका की बात है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब जंग को आगे खींचने के मूड में कतई नजर नहीं आते, लेकिन उनके करीबियों की मानें तो ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के साथ जंग भी खत्म हो जाए और यूएस का सम्मान भी बना रहे, लेकिन जो यूरेनियम और स्ट्रेट होर्मूज सरीखी ईरान की दो शर्तें यूएस के सम्मान में बड़ी दीवार बनी हुई हैं। दरअसल ईरान काे समझ में आ गया है कि स्ट्रेट होर्मूज उसके लिए अब कमाई का एक बड़ा और स्थायी जरिया है। जिस रास्ते से अभी तक दुनिया को फ्री आवाजाही की इजाजत थी, ईरान ने पानी का वो रास्ता अपनी आमदनी के जरिये के रूप में यूज करना शुरू कर दिया है। इस वक्त जितने भी शिप स्ट्रेट होर्मूज से गुजर रहे हैं उनसे भारी भरकम यानि इंडियन करेंसी में एक शिप से करीब 80 लाख की वसूली की जा रही है। ईरानी भी मानते हैं कि उनको स्ट्रेट हाेर्मूज की कीमत काफी देर से पता चली। यूएस से किसी समझौते पर राजी होने के सवाल पर ईरानी अधिकारियों की बातचीत में अब आक्रामकता अधिक नजर आ रही है। ऐसा लगता है कि इंटरनेशनल कूटनीतिक तौर तरीके उन्होंने फिलहाल एक तरफ रख दिए हैं। ईरानियों के बयान बता रहे हैं कि वो अब बजाए बातचीत के यूएस से टकराव पर अमादा हैं। राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के बयानों से साफ है कि वो लोग अब सैन्य और टकराव के विकल्पों पर अधिक ज़ोर दे रहे हैं। इसके इतर यूएस टकराव से कन्नी काट रहा है।

युद्ध विराम के बाद मजबूत हुआ ईरान

माना जा रहा है कि 8 अप्रैल से अमेरिका की ओर से घोषित किए गए युद्ध विराम का यूज ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता और ताकत बढ़ाने में किया है। इस काम में ईरान के दो देश चीन और रूस बेहद मददगार साबित हुए। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि चीन व रूस से मिलनी तमाम तरह की मदद के बाद ही ईरानी का रवैया आक्रामक नजर आ रहा है। ऐसा लगता है कि ईरान नहीं चाहता है कि आसमान से जंग के बादल छंटें। ईरान ने अब अपनी शर्तों को पहले से और भी ज्यादा कड़ा कर दिया है। ईरानी वार्ताकारों ने बातचीत में लचीलेपन की गुंजाइश फिलहाल खत्म कर दी है। इसका अंदाजा एक ईरानी फौजी अफसर के उस बयान से लगाया जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा कि यूएस बातचीत की बात तभी करता है जब ईरानी मिसाइलें एक्टिव होती हैं। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान से बातचीत बहुत अच्छी जा रही है और दोनों देश समझौते के करीब पहुंच चुके हैं।

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