मेरठ। नगर निगम के स्वास्थ्य विभग के स्टाफ की कारगुारियों के चलते हापुड़ हाइवे डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गया है। महानगर की घनी आबादी वाले नगर निगम के हापुड़ रोड पुराना कमेला इलाका डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गया है। पुराना कमेला जहां प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने कमेला हटवाए जाने के बाद राजकीय कन्या इंटर कालेज खुलवा दिया था और जिसमें बड़ी संख्या में बेटियां इलम की तालीम के लिए आती हैं उनका और इस इंटर कालेज के स्टाफ का इलाके को डंपिंग ग्राउंड मे तब्दील कर दिए जाने की वजह से सांस लेना भी मुहाल हो गया है। लोगों ने बताया कि अब तो हालत यह हो गयी है कि ना जाने किन्हीं कारणों से नगर निगम के अफसरों ने भी इस इलाके से मुंह मोड़ लिया है। ऐसा क्यों किया जा रहा है यह तो अफसर ही जाने लेकिन हालात कितने ज्यादा नाजुक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों का कहना इस इलाके के दोनों पार्षद भी डंपिंग ग्रांउड की समस्य के सामने अब डंप नजर आ रहे हैं।
लिसाड़ीगेट चौराहे से लेकर पुराना कमेला हापुड़ हाइवे की यइि बात की जाए तो यहां पहले ही नजर में नारकीय हालात नजर आते हैं। सड़क के दोनों ओर जगह:जगह कूड़े के पहाड़ हैं। जो सड़क चलने के लिए हैं वहां पर दूर तक जहां तक भी नजर आती है, वहां कचरा फैला दिया गया है। कुत्ते व दूसरे आवारा पशु जिनका मुस्लिम इलाकों में नाम लेने में परहेज बरता जाता है, वो इस गंदगी को इधर उधर फैलाने में नगर निगम के स्टाफ के मददगार साबित हो रहे हैं। हालात कितने बुरें हैं मेन हापुड़ से लिसाड़ीगेट की ओर जाने वाले रास्ते पर आधी सड़क तक फैंके या कहें डंप किए गए कचरे से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यह का कोई दूसरा या इस इलाके के लोग नहीं बल्कि नगर निगम का स्टाफ कर रहा है। यहां कचरा डंप करने का काम वहीं कर रहे हैं।
नाम ना छापे जाने की शर्त पर लोगों ने बताया कि पार्षदों की बेबसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो सफाई की समस्या पर कुछ सुनना या कहना ही नहीं चाहते। इतना जरूर है कि सरकार का हिस्सा रालोद के नेता व पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार जरूर यहां की समस्या को लेकर आवाज उठाते रहते हैं। उनके कहने पर ही नगरायुक्त ने इस इलाके का दौरा किया। लेकिन नगरायुक्त का दौरे के बाद भी लिसाड़ीगेट वाया पिलोखड़ी पुल, कांच का पुल और पुराने कमेले से आगे तक के रास्ते पर मेन हाइवे पर बना दिए गए डंपिंग ग्राउंड की मुसीबत से इस इलाके को निजात नहीं मिल सकी।
गर्मी का मौसम और पूरा इलाका गंदगी और सड़ांध से सराबाेर जब होगा तो घर-घर बीमारियां तो फैलेंगी ही। रालोद नेता पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार बताते हैं कि एक तो जानलेवा गर्मी यानि जून का महीना, उस पर ओड़ियन नाला जो सफाई ना किए जाने की वजह से हमेशा चोंक रहता है। और रही सही कसर हाइवे पर डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया जाना। इसकी वजह से इस रोड से सटी तमाम कालोनियां और गली माेहल्लों में घर-घर संक्रमण यानि हवा से फैलने वाली बीमारियों के मरीज मिल जाएंगे। यहां की हवा इस लायक नहीं रह गयी है कि सांस ली जा सके। सांस लेने में हजारों रोगाणु जिस्म में दाखिल होत हैं। ऐसा नहीं कि नगर निगम के अफसर इस इलाके की बदहाली से वाकिफ नहीं है। वो यहां की मुसीबत भरी लाेगों की जिदंगी से अच्छी तरह वाकिफ तो हैं, लेकिन ना जाने किन्हीं कारणों से इस इलाके को विकास से दूर रखा जा रहा है। इसकी वजह क्या हो सकती है यह तो महापौर या नगरायुक्त ही बता सकते हैं।
यह दी जा रही सफाई
महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि हापुड़ रोड पर विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। नगरायुक्त ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था करायी जा रही है। जो भी कचरा वहां डाल दिया जाता है, उसको गाड़ियां लगाकर हटवाया भी जाता है।
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