नई दिल्ली। ईरान मसले पर मदद की उम्मीद में बीजिंग आए डोनाल्ड ट्रंप वो हासिल नहीं कर सके जो वो चाहते थे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से कोई ठोस वादा नहीं किया है। ट्रंप चाहते थे कि मिडिल ईस्ट के मसलों खासतौर से ईरान पर चर्चा अधिक हो, लेकिन चीनी के ऑफिशल्स ने इस ट्रंप के बीजिंग दौरे को वाणिज्यिक ब्रेक देकर रोक दिया। इतना ही नहीं हालात उस समय बेहद नाजुक हो और खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप असहज हो गए जब डिनर मीट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के मसले पर अमेरिका से घुड़कने के अंदाज में बात की। शी जिनपिंग यहीं नहीं रूके उन्होंने चेतावनी दी कि ताइवान का मसला छेड़ने का मतलब बड़े संघर्ष को न्यौता देना। पश्चिमी मीडिया उनकी बातों का निहितार्थ सीधे जंग का न्यौता देने से लगा रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा ईरान के साथ जंग की छाया में गुजरी।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ताइवान पर खरीखरी लेकिन अमेरिका का स्टैंड ताइवान पर आज भी पुराना ही रहा। शी जिनपिंग ने जो कुछ कहा उसको लगता है कि अमेरिका ने ना केवल खारिज कर दिया बल्कि बता दिया की ताइबान पर बलात कब्जे का मुखर होकर विरोध किया जाएगा। चीन हमेशा से ताइवान को अपना हिस्सा बताता है, ताइवान इसका विरोध करता है। जापान और अमेरिका जैसे देश ताइवान के साथ नजर आते हैं।
बातचीत के दौरान दोनों देशों के ऑफिशल्स के बीच स्ट्रेट हाेर्मूज सैंटर में रहा। अमेरिका पुरजाेर तरीके से स्ट्रेट हाेर्मूज को खोले जाने की वकालत करत रहा, लेकिन चीनी से जो गरमजोशी इस मुद्दे पर चाहिए थी उसकी कमी साफ नजर आती थी। दरअसल पानी के इस रास्ते को लेकन चीनी को कोई परेशानी नहीं है। ईरान पहले से ही चीनी जहाजों को आने जाने दे रहा है। अमेरिका बार-बार स्ट्रेट हाेर्मूज से मुक्त आवाजाही की बात कह रहा है। इस बीच उम्मीद की जा रही है कि एक बड़ी रकम के व्यापारिक समझौते दोनों देशों के बीच होने तय हैं।
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