नई दिल्ली। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में औसत मासिक आयात 60 टन था, जबकि अप्रैल 2025 में यह 35 टन रहा था। इस महीने देश में केवल 15 मीट्रिक टन सोने का आयात हुआ। विशेषज्ञ इसको देश की वाणिज्यिक सेहत के लिए ठीक नहीं मानते, लेकिन उनका भी कहना है कि कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा है। वहीं दूसरी ओर सोने में कारोबार करने वाले बाजार से तेजी से बढ़ रही दूरी से परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो देश ही नहीं एशिया की सबसे बड़ी सोने की मंड़ी मेरठ के शहर सर्राफा बाजार तो बेरौनक हो जाएगा। अप्रैल में सोने का आयात बिल घटकर $1.3 अरब रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के औसत $6 अरब प्रति माह से काफी कम है।
आयात में गिरावट के कारण
सबसे बड़ी वजह बैंकों और सीमा शुल्क (Customs) विभाग के बीच 3% एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) को लेकर उपजा विवाद है। 2017 से बैंकों को इस टैक्स से छूट मिली हुई थी, लेकिन अचानक इसकी मांग शुरू होने से बैंकों ने शिपमेंट क्लियर करना रोक दिया है। सोने के दाम आसमान छू रहे हैं जिसकी वजह से अक्षय तृतीया जैसे बड़े त्योहार के बावजूद, रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के कारण बाजार में सोने की मांग उम्मीद से काफी कम रही। केंद्र की मोदी सरकार खासतौर से वित्त मंत्री ने हालातों पर काबू नहीं किया तो ठीक नहीं होगा। सोने के आयात में भारी कमी से देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करने और रुपये की स्थिति को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। हालांकि आयात कम होने के बावजूद भारत के पास वर्तमान में 880 टन सोना गोल्ड रिजर्व के रूप में सुरक्षित है। वहीं दूसरी ओर ऊंचे दामों के कारण लोग अब भारी ज्वेलरी के बजाय सिक्के (Coins), बिस्कुट और गोल्ड ETF जैसे निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में ज्वेलरी की मांग में करीब 19-23% की गिरावट आई है। सोने के आयात में आई इस ऐतिहासिक गिरावट का असर सीधे तौर पर बाजार की कीमतों और ज्वेलरी सेक्टर की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। सोने का भाव की बात करें तो 24 कैरेट (शुद्ध सोना): ₹1,50,380 से ₹1,52,460 के बीच। 22 कैरेट (ज्वेलरी गोल्ड): ₹1,37,850 से ₹1,39,653 के आसपास। 18 कैरेट: ₹1,12,790 के लगभग। कीमतों में यह भारी उछाल वैश्विक अस्थिरता और आपूर्ति (Supply) में कमी के कारण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना $4,600 प्रति औंस के पार कारोबार कर रहा है। बैंकों द्वारा शिपमेंट रोकने की वजह से ज्वेलर्स के पास नए स्टॉक की कमी हो गई है। अक्षय तृतीया जैसे व्यस्त सीजन के दौरान भी कई बड़े शोरूम्स को पुराने स्टॉक और रीसाइकिल्ड गोल्ड (पुराना सोना) पर निर्भर रहना पड़ा है।
Leave a comment