मेरठ। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का अब किसान संगठनों ने भी खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन आजाद के बैनर तले दर्जनों किसान ऊर्जा भवन पहुंचे और पंचायत की। टीपीनगर के साबुन गोदाम इलाके में तथा मोहनपुरी में भी स्मार्ट मीटरों को लेकर बबाव हुआ। इसके अलावा कुछ लोग कलेक्ट्रेट भी स्मार्ट मीटरों की शिकायत को लेकर पहुंचे। विरोध करने वालाों का कहना है कि पीवीवीएनएल अफसर मुकदमे लगाकर आंदोलन पर रोक लगाना चाहते हैं। लेकिन यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल चुका है। मामला विधानसभा में भी उठाया गया है। सरकारक को स्मार्ट मीटर वापस लेने ही होंगे। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगर स्मार्ट प्रीपेड मीटर की मनमानी नहीं थमी तो किसान घरों पर लगे स्मार्ट मीटर उखाड़कर विभाग को सौंप देंगे। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन बालियान के नेतृत्व में भारी संख्या में किसान ऊर्जा भवन पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इतनी संख्या में किसानों को देखकर वहां मौजूद कर्मचारियों में खलबली मच गई। उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया इसके कुछ देर बाद सिविल लाइन थाने की पुलिस भी पहुंच गई। इसके बाद किसानों ने पंचायत शुरू कर दी। नितिन बालियान ने कहा कि जब से गांव में स्मार्ट मीटर लगने शुरू हुए हैं, तब से किसान आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हो गया है। उन्होंने कहा जबरन स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं। रिचार्ज खत्म होते ही किसान की बिजली गुल हो जाती है। उन्होंने कहा कि जब किसान और मजदूर को मिलने वाला भुगतान डिजिटल नहीं हुआ है तो फिर इन डिजिटल मीटर का क्या मतलब है।युवा नेता अक्षय रावत ने कहा कि स्मार्ट मीटर देश को डिजिटल गुलाम बनाने की एक बहुत बड़ी साजिश है जिसका हर किसी को विरोध करना होगा। लोकतंत्र की इस व्यवस्था को लूट तंत्र में तब्दील करने का प्रयास हो रहा है। हर कोई यह समझ ले कि इसके द्वारा घर में घुसने की साजिश रची जा रही है।
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