Home मेरठ महिला बिल पर निगम में घमासान
मेरठ

महिला बिल पर निगम में घमासान

महिला बिल पर निगम में घमासान

Share
महिला बिल पर निगम में घमासान
Share
मेरठ। नगर निगम में राजनीति फुल है, लेकिन इस राजनीतिक आपाधापी में आम आदमी से जुड़े मुद्दे गुल हो गए हैं। भाजपा और विपक्ष दलों ही आस्तीन चढ़ाए नजर आ रहे हैं। इस बार राजनीति का अखाड़ा नारी वंदन अधिनियम को लेकर रहा। सीसीएसयू के  नेताजी सुभाष चंद प्रेक्षागृह में नगर निगम की विशेष बोर्ड बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान सांसद अरुण गोविल ने नारी वंदन अधिनियम संशोधित विधेयक पारित न होने को लेकर निंदा प्रस्ताव रखा, जिसे भाजपा के सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। हालांकि विपक्षी दलों के पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार किया। बैठक की अध्यक्षता महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने की। बैठक के दौरान सांसद अरुण गोविल ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां महिलाओं के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए नारी वंदन अधिनियम बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन विपक्षी दलों के रवैये से यह पारित नहीं हो पाया। बैठक में ऊर्जा मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और कैंट विधायक अमित अग्रवाल के अलावा महानगर संगठन की तीनों विधानसभाओं से कई पदाधिकारी मौजूद रहे। भी मौजूद रहे। शहर कांग्रेस अध्यक्ष रंजन शर्मा ने भाजपा पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि महानगर की जनता ने भले ही अपने वार्डों की समस्या के लिए समाधान के लिए महापौर व पार्षदों को चुनकर भेजा हो, लेकिन नगर निगम में बजाए आम आदमी की चिंता परेशानी पर मंथन चिंतन के बजाए भाजपा के ऐजेंडे पर मंथन व चिंतन हो रहा है। विपक्षी दलों के पार्षदों व पूर्व पार्षदों ने महापौर का आइना दिखाते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण मिले इसका विरोध कोई नहीं कर रहा है, लेकिन नगर निगम की विशेष बोर्ड बैठक महिला बिल के नाम पर बुलाए जाने काे लेकर भाजपा के तमाम पार्षद सवाल भी उठा रहे हैं, यह बात अलग है कि पार्टी अनुशासन से बंधे होने की वजह से वो निगम बोर्ड का हिस्सा बने, लेकिन नाम ना छापे जाने की शर्त पर तमाम भाजपा के तमाम पार्षदों ने माना कि बेहतर होता यदि महापौर शहर की समस्याओं पर मंथन के लिए बैठक बुलाते। यदि वो ऐसा करते तो इससे सबसे बड़ी मदद तो भाजपा की करते, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, भाजपा संगठन के निर्देश पर निगम बोर्ड में महिला बिल पर बैठक बुला ली गयी। भाजपा का महिला संगठन केवल मेरठ या यूपी में ही नहीं देश भर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। याद रहे कि साल 2023 में महिला बिल लोकसभा सर्वसम्मति से पास हो गया था यह बात अलग है कि मोदी सरकार तीन साल तक नाेटिफिकेशन करना बिराए रही। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार भाजपा ने गठरी से महिला बिल निकला और संशोधन के नाम येन केन प्रकरेण बिल सदन में गिर जाता है महानगर की समस्याओं की यदि बात करें तो गंदगी की समस्या ने पूरे शहर काे नर्क बना दिया। नाले नालियां गोबर व कूडे कचरे से अटे पड़े हैं। गंदगी की समस्याओं की शिकायत करने वालों में सबसे आगे भी भाजपा के पार्षद हैं, लेकिन लगता है कि केवल महापौर को ही यह समस्या नजर नहीं आ रही है। पहले तो सफाई कराते ही नहीं यदि करा दी जाए तो कूडा उठाने के बजाए दहन करा दिया जाता है। शहर में तमाम ऐसे स्थल हैं जहां नगर निगम का स्टाफ अवैध पार्किंग संचालित करा रहा है। आसपास जाम लगा रहता है। स्ट्रीट लाइटें दिन में भले ही जलें शाम ढलते ही ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें बुझ जाती हैं। महानगर की जनता स्मार्ट मीटर की समस्याओं से बेहाल है लेकिन यह समस्या न तो निगम की बोर्ड बैठक बुलाने वालों को नजर आती है और ना ही भाजपा के पार्षदों को जो लदबद कर इस बैठक में मौजूद रहे। ये वो समस्याएं हैं जिनका सीधा सरोकार पब्लिक से है। लेकिन निगम की हालत देखकर लगता है कि मानों ठान लिया है कि सारे काम करने हैं लेकिन वो काम नहीं करना है जिससे पब्लिक को राहत मिले।

संयुक्त पार्षद दल का महापौर व भाजपा पर बड़ा हमला

संयुक्त पार्षद दल ने इस मुद्दे पर महापौर व भाजपा पर बड़ा हमला बोला। केसरगंज दिल्ली राेड स्थित होटल मयूर में बुलायी गयी प्रेस वातो में उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) से सम्बन्धित संविधान (131वां) संशोधन अधिनियम विधेयक 2026 लोकसभा में पारित न होने पर नगर निगम में सदन की बैठक में निन्दा प्रस्ताव लाया जा रहा है जिसका सभी विरोध करते हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष रंजन शर्मा, पार्षद कीर्ति षोपाला,रूबीना चौ शमशाद, मदन पाल, मोहम्मद शाहिद, कहकाशां, जीशान शाहिद अब्बाासी, अफजाल सैफी आदि ने कहा कि जब 20 व 21 सितम्बर 2023 को लोकसभा और राज्य सभा में उपरोक्त महिला आरक्षण बिलं सर्वसहमति से पास हो गया था जिसमें 456 सांसदों ने लोकसभा तथा 214 सांसदों ने राज्यसभा में सर्वसम्मति से उक्त बिल को महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए पास कर दिया था जिसका नोटिफिकेशन भी हो गया था तथा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी हो गये थे तो उसके अनुरूप महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया किसने रोका था । महिलाओं को जो 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना था उसे विपक्ष ने ही 30 महीनों तक सरकार में क्यों रोका, 30 महीनों तक सरकार क्यों चुप बैठी रही, बंगाल और तमिलनाडू के चुनाव को ध्यान में रखकर केवल 1 दिन में बिल को नोटिफाईड कराकर अगले ही दिन सदन में सांसदों को गुमराह करने के लिये रख दिया गया ये केवल चुनाव में अपनी राजनैतिक रोटी सेकने के उद्देश्य से किया गया महिलाओं को आधार बनाकर ताकि इस बिल को आधार बनाकर विपक्ष पर वार किया जा सके । 2011 में जनगणना हुई थी उसमें जातिगत जनगणना नहीं हुई थी हमारी मांग है कि अब जो जनगणना होगी उसमें जातिगत जनगणना भी होनी चाहिए उसमें जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के अनुसार ST, SC, OBC को जितना आरक्षण मिले उसमें 33 प्रतिशत कोटा महिलाओं का रखा जाये । 2023 में सर्व सहमति से उपरोक्त महिला बिल पारित हो गया था तो फिर 2024 के लोकसभा के चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण नगर निकाय के अनुसार महिलाओं को क्यों नहीं दिया गया उन्हें क्यों वंचित रखा गया । नगर निगम में इस तरह का प्रस्तव लाने का कोई औचित्य ही नहीं है क्योंकि यहां जनहित के मुद्दों पर कोई प्रस्ताव नहीं लाया जाता जबकि यहां महानगर में जनता गृहकर, जलकर, टूटी सड़कों, सफाई व्यवस्था व पूरे महानगर में धूल से परेशान है, धूल होने से लोग दमें के मरीज होगए हैं। शहर में सफाई का इंतजाम नहीं, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। लोग परेशान हैं। शुद्ध पेयजली नहीं। अफसर निगम में बैठते नहीं लोग कहें तो किस से कहें।
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

3 × two =

Related Articles

डीजे व डीएम पहुंचे नारी निकेतन

डीजे व डीएम पहुंचे नारी निकेतन

डीएम ने ली बाढ स्टेयरिंग ग्रुप तथा हीटवेव की बैठक

डीएम ने ली बाढ स्टेयरिंग ग्रुप तथा हीटवेव की बैठक

यूथ एंड फंडामेंटल ट्रुथ्स ऑफ लाइफ एप्रोच विषय पर सेमिनार

यूथ एंड फंडामेंटल ट्रुथ्स ऑफ लाइफ एप्रोच विषय पर सेमिनार

डीएम ने ली व्यापार बंधु की बैठक

डीएम ने ली व्यापार बंधु की बैठक