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राम जी आ तो आ गए क्या दूर हो पाएंगे संकट

राम जी आ तो आ गए क्या दूर हो पाएंगे संकट

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राम जी आ तो आ गए क्या दूर हो पाएंगे संकट
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मेरठ। शास्त्रीनगर सेक्टर दो और सेंट्रल मार्केट में नेता और अफसर दोनों के बीच आवंटी पिसकर रह गया है। नेता लगातार कुछ नहीं होगा हम हैं ना के स्टाइल में आवश्वासन दे रहे हैं तो आवास विकास के अफसर बोल रहे हैं तो कि यदि सेटबैक नहीं छोड़ा तो छोड़ेंगे नहीं खुद ही सेटबैक को छोड़ दो वर्ना गिरा दिया जाएगा। इसके अलावा सेंट्र्रल मार्केट की यदि बात की जाए तो व्यापारियों को राहत की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। व्यापारी चाहते हैं कि सूबे की योगी सरकार एक ध्यायदेश लोकर उनके भवनों को बचा लें, नेता बार-बार कह रहे हैं योगी सरकार सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ है और यहां भी अफसर कह रहे हैं कि जो भी कार्रवाई हो रही है सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर हो रही है। सुप्रीमकोर्ट का आदेश जरूर लागू किया जाएगा। उसमें कोई कोतवाही नहीं बरती जाएगी । आवास विकास के अफसरों की एक टीम आज सुबह सेक्टर दो जा पहुंची और सेटबैक को लेकर नोटिस चस्पा कर दिए गए। एक दिन पहले ही राहत के नाम पर जो कुछ चला उससे व्यापारी मुतमइन तो नहीं थे, उम्मीद जरूर जगी थी, लेकिन आज सुबह जब आवास विकास वालों ने मकानों पर नोटिस चस्पा किए तो रही सही उम्मीद की किरन भी एक ही झटके में बुझ गयी। परिषद के अफसर अब अपने ही बॉयलॉज जो साल 1982 का है उसको खारिज करने पर उतर आए हैं। सेटबैक के नोटिसों से परेशान आवंटी जब अफसरों को बॉयलॉज दिखाते हैं तो अफसरों का माथा गरम हो जाता है। आवंटियों ने बताया कि अफसरों ने अब कहना शुरू कर दिया है कि उन्हें पता तब क्या परिस्थतियां रही होंगी, लेकिन यह बॉयलॉज आज निष्प्रभावी हो चुका है। आवास विकास ने तब 35 और 65 गजे के जो मकान बनाकर बेचे थे उनमें से किसी में भी सेटबैक नहीं छोड़ा गया था, उस बात को भी अब अफसर सुनने को तैयार नहीं है। आज सुबह जब नोटिस चस्पा किए जा रहे थे तो एक ही बात कही गयी तो तो सेटबैक छोड़ों नहीं तो फिर आवास विकास मकान तोड़ देगा। भाजपा के जो नेता अब तक मदद के लिए आगे आ रहे थे तमाम हालात के बाद अब वो भी हताश हैं। उनकी हताश की वजह कोई माकूल रास्ता ना निकल पाना है। आवास विकास परिषद के अफसर अपने कागजों का मानने को तैयार नहीं।भाजपा नेताओं का कहना है कि जिस रास्ते पर चलकर राहत दी जा सकती है सरकार उस पर चलने का इरादा नहीं रखती। ऐसे तो धीरे-धीरे केवल वक्त ही हाथ से निकल रहा है। भाजपा नेताओं की नजर में इसका एक मात्र तरीका या तो साल 1982 के बॉयलॉज को आवास विकास परिषद के अफसर मानें या फिर अध्यादेश लाकर सभी निर्माण वैध मान लिए जाएं।

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