नई दिल्ली। अमेरिका की निगरानी में शुरू हुए सीजफायर के बाद अब विस्थापित लेबनानी वतन लौटने लगे हैं। ये बेरूत में भी बड़ी संख्या में लौटे हैं, लेकिन वो तमाम प्रकार की शंकाओं से भरे हुए हैं। उनने दिलों से इजरायली एयर स्ट्राइक में होने वाली बारिश का खौफ साफ देखा जा सकता है। इन लोगों को तमाम रास्तों से लेबनान की ओर बढ़ते देखा जा सकता है। यह नजारा तमाम मानवाधिकारवादियों के लिए वाकई सुखद है। कई ने इसको लेकर पोस्ट भी किया है। जिसमें कहा है कि मुल्क और घरों की वापसी से शानदार कुछ भी नहीं।
आशियना नहीं फकत उम्मीद बाकि
इजरायल की एयर स्ट्राइक में लेबनान के तमाम शहर बर्बाद हो गए हैं। वहां आशियाने खत्म कर दिए गए हैं। आशियना ना होने के बाद भी वो आशियाना बना लेने की हसरत लेकर अपने वतन की ओर चल रहे हैं। भारी थकान के बाद भी वो रूकना नहीं चाहते। दक्षिणी सीमा के पास इजरायली गोलाबारी और घरों को ध्वस्त किए जाने की लगातार खबरों के बावजूद हजारों विस्थापित लेबनानी परिवार अपने घरों में लौट रहे हैं। लगभग 40,000 घर नष्ट हो गए थे या क्षतिग्रस्त हो गए थे। बेरूत के दक्षिणी उपनगर सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से थे, इसके बाद दक्षिणी लेबनान के अन्य जिले प्रभावित हुए। बेरूत के दक्षिणी उपनगर की निवासी सामिया लॉवंड ने कहा, “मैं अपने घर की जाँच करने और कुछ सामान लेने आई थी।”
जो लोग लौट रहे हैं उनके कंधों पर थैले हैं। सिरों पर गद्दे हैं। उनकी जिदंगी इसी में सिमटी नजर आती है। उनकी हालत बता रही है कि वो खुले आसमान के नीचे विस्तापितों की जिदंगी जो एक जहनुम सरीखी है वो बसर करने को मजबूर है, लेकिन अब शायद ऐसा ना हो। शनिवार को गद्दे, थैले और बचाए गए सामान से लदी गाड़ियाँ लगातार दक्षिण की ओर जाती रहीं, क्योंकि परिवार यह देखने के लिए वापस जा रहे थे कि उनके घर बचे हैं या नहीं। नबातीह से विस्थापित हुए फ़ादेल बदरेद्दीन ने कहा, “यहाँ तबाही मची है और रहना नामुमकिन है। हम अपना सामान लेकर फिर से जा रहे हैं।” तमाम ऐसी फैमलियां हैं जो इजरायली एयरस्ट्राइक में बार-बार तवाह ओ बर्बाद हुई, लेकिन उनका जज्वा कायम है।
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