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सेंट्रल मार्केट के 44 अवैध निर्माणाें का गिरना तय

सेंट्रल मार्केट के 44 का गिरना तय

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बाकियों का फैसला होगा बाद में, सुप्रीमकोर्ट में हुई अवैध निर्माणों को लेकर सुनवाई

मेरठ। शास्त्री नगर के 44 अवैध निर्माणाें पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गयी है। इनको ध्वस्त करने का आदेश 9 अप्रैल को आ सकता है। बाकि अवैध निर्माणों का फैसला अगली सुनवाई के बाद होगा। साेमवार को सुप्रीमकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को कड़ी फटकार लगायी गयी। यह फटकार उस आदेश के लिए लगायी गयी जिसमें उन्होंने विगत 27 अक्तूबर को दिया था। वहीं दूसरी ओर आवास विकास परिषद के अफसरों ने पुलिस प्रशासन द्वारा फोर्स उपलब्ध ना कराने की बात कहकर बचकर निकलना चाहा। हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने 44 अवैध निर्माणों जिनमें स्कूल व नर्सिंगहोम भी शामिल हैं चौबीस घंटे के भीतर सील करने के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि इनका ध्वस्तीकरण तय है, बाकियों के भाग्य का फैसला बाद में होगा। इस सबके बीच बड़ा सवाल यही कि जब ये अवैध निर्माण किए जा रहे थे तब सिस्टम को चलाने वाले खासतौर से आवास विकास के अफसर क्या कर रहे थे, क्या यह मानलिया जाए कि उन्होंने हाथ मिला लिया था। आरटीआई एक्टिविस्ट राहुल ठाकुर का कहना है कि जिन 45 अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करायी गयी है उनकी गिरफ्तारी कब होगी। क्योंकि वो भी कम कसूरवार नहीं। राहुल ठाकुर ने यह भी कहा कि वह सीएम से मिलने के लिए मेरठ से लखनऊ तक पैदल यात्रा करेंगे।

सोमवार को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन ने इस प्रकरण पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को जान जोखिम में है। कोई हादसा होता है तो बच्चों की जान भी जा सकती है। ऐसे स्कूलों में बिजली का कनेक्शन कैसे दिया गया है इसकी भी जांच करने के आदेश दिए हैं। सुनवाई की अगली तिथि नौ अप्रैल निर्धारित की गई है। मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को सुप्रीम कोर्ट के आदेश खिलाफ ध्वस्तीकरण बंद करने का आदेश जारी करने के लिए पूछताछ की। याचिकाकर्ता के लोकेश खुराना के वकील तुषार जैन ने मामले में बहस की कहा ऐसी स्थिति परिषद की अन्य योजनाओं में भी है। कोर्ट ने स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों और दूसरी जगह दाखिला और नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को दूसरे नर्सिंग होम में शिफ्ट करने के लिए कहा है। शास्त्रीनगर योजना संख्या सात में ऐसे चार से छह स्कूल चल रहे हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन को इस कार्रवाई को करने के लिए जिम्मेदारी तय ही है।

यह है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छह सप्ताह के भीतर ध्वस्तीकरण के सख्त आदेश दिए थे। ध्वस्तीकरण की जद में कुल 1468 निर्माण बताए गए हैं, जो मूल रूप से आवासीय हैं लेकिन वर्तमान में वहां शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जे. बी. पारदीवाला और के. वी. विश्वनाथ ने कड़ा ऐतराज जताते हुए पूछा कि अब तक अनुपालन रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। अदालत ने इसे अवमानना की स्थिति बताते हुए 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। शास्त्रीनगर योजना संख्या सात में 860 भूखंडों पर निर्मित दुकानों के भविष्य को लेकर इसमें फैसला होने की उम्मीद है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव आवास व आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी गुरुप्रसाद और मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

आवास विकास परिषद की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उप्र आवास एंव विकास परिषद ने चार अप्रैल को अपना हलफनामा कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया है। परिषद ने अपनी रिपोर्ट में 210 निर्माण ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनका भू उपयोग परिवर्तन संभव नही हैं। रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन को भी दी गई है।

दो अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद के 27 अक्टूबर 2025 के आदेश को व्यथित करने वाला बताया था। वर्तमान में राजस्व सचिव ने यह आदेश सेंट्रल मार्केट 661/6 पर निर्मित कांप्लेक्स के ध्वस्त होने के बाद दिया था। जोकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में किया गया था। आदेश में कहा गया था कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब नहीं होगी। इसके साथ सेंट्रल मार्केट को बाजार स्ट्रीट घोषित करने के लिए मास्टर प्लान में प्रविधान करने के लिए कहा था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत माना गया है। इसीलिए कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

चर्चा में ये भी हैं शामिल
जिन्हें बुलडोज किए जाने की बात बतायी गयी है उनमें बड़ा नाम एमपीजीएस का एक बड़ा हिस्सा, रंगोली मंडप, कौशल्या मंडप व रॉयल विवाह घर, होटल साहिल, स्वाति फर्नीचर, आकर्षक साड़ी शोरूम, मॉडल स्कूल, डीआरएस स्कूल, वर्धमान, एमएलएम बिल्डिंग सरीखे भवन शामिल हैं।

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