देहरादून, उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। 1 अप्रैल से मदरसों में नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य मुस्लिम बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर तथा अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करना है।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने जानकारी देते हुए बताया कि मदरसों के पंजीकरण के लिए बनाए गए पोर्टल की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। सभी मदरसों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द अपनी पूरी जानकारी इस पोर्टल पर दर्ज कराएं। जो मदरसे तय समय-सीमा में पंजीकरण नहीं कराएंगे, उन्हें बाद में पंजीकरण और मान्यता संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
अध्यक्ष ने कहा कि जिस तारीख से मदरसा बोर्ड को समाप्त किया गया है, उसके बाद लागू होने वाली नई शिक्षा व्यवस्था मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। अब मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा का अधिकार मिलेगा। वे केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और अन्य समकालीन विषयों के साथ आगे बढ़ सकेंगे। इससे उनका भविष्य मजबूत बनेगा और वे धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार के शोषण से बच सकेंगे।
उन्होंने इसे उत्तराखंड सरकार की दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल मुस्लिम बच्चों के भविष्य को संवारने वाला है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल भी साबित हो सकता है।
पृष्ठभूमि:
उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर उसके स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसे सहित) को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी और आधुनिक पाठ्यक्रम अपनाना होगा।
यह बदलाव बच्चों को बेहतर शिक्षा, बेहतर अवसर और एक उज्ज्वल भविष्य देने की दिशा में उठाया गया सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
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