विक्रम श्रीवास्तव
देहरादून, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रोड रेज की घटनाएं दिन-प्रतिदिन खतरनाक रूप ले रही हैं। ओवरटेकिंग, गाड़ी पास न देने या ट्रैफिक की छोटी-मोटी बहस अब मारपीट, तोड़फोड़, हथियारबंद हमले और गोलीबारी तक पहुंच रही है। आज मसूरी रोड पर हुई एक बेहद दर्दनाक घटना ने इस समस्या की गंभीरता को पूरे राज्य के सामने ला दिया है।
सुबह करीब 6:50 बजे राजपुर थाना क्षेत्र के जोहड़ी गांव के पास दिल्ली नंबर की फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो N के बीच गाड़ी पास न देने को लेकर तीखा विवाद हो गया। स्कॉर्पियो सवारों ने फॉर्च्यूनर का पीछा किया और उसे रोकने के लिए उसके टायरों पर फायरिंग कर दी। दुर्भाग्य से, एक गोली सड़क किनारे नियमित मॉर्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड आर्मी ब्रिगेडियर वीके जोशी (जिन्हें मुकेश जोशी भी कहा जाता है) को लग गई। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
फायरिंग के बाद फॉर्च्यूनर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। आरोपीयों ने फॉर्च्यूनर सवारों के साथ मारपीट की और कार को क्षतिग्रस्त कर दिया। फॉर्च्यूनर में सवार दो लोगों को चोटें आईं। सभी आरोपी स्कॉर्पियो सवार मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पूरे जनपद में नाकेबंदी लगाकर सघन चेकिंग शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपीयों की तलाश कर रही है।
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले एक साल में देहरादून और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में रोड रेज की कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं:
• मई 2025, राजपुर रोड: नशे में धुत चार युवकों ने हरियाणा नंबर की फॉर्च्यूनर से एक परिवार वाली कार को रोका, परिवार को धमकाया और गाड़ी क्षतिग्रस्त कर दी। डैशकैम वीडियो वायरल होने के बाद सभी आरोपी गिरफ्तार हुए।
• मई 2025, रानीपोखरी: दो गाड़ियों की टक्कर के बाद हुई मारपीट और पथराव में 9 लोग गिरफ्तार हुए तथा उनकी गाड़ियां जब्त की गईं।
• नवंबर 2025, राजपुर रोड: पूर्व बीजेपी विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्ये प्रताप सिंह पर रोड रेज में मारपीट का आरोप लगा। उनके गनर सहित FIR दर्ज हुई और हथियार लाइसेंस सस्पेंड किए गए।
• मार्च 2026, धर्मावाला और विकासनगर: नशे में युवकों द्वारा लोगों को पीटने और गाड़ी से कुचलने की कोशिश के वीडियो वायरल हुए, जिनमें पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की।
• रुद्रपुर और अन्य क्षेत्र: रोड रेज से हिंसक झड़पें और गंभीर चोटें आम होती जा रही हैं।
देहरादून के स्थानीय निवासी अब खुलकर कह रहे हैं कि यह संस्कृति पहले यहां की नहीं थी। बढ़ता ट्रैफिक दबाव, नशे का सेवन, हथियारों की आसान उपलब्धता और छोटी बातों पर गुस्सा काबू से बाहर होने से ये घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आक्रामक ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं में भी एक बड़ा कारक बन गई है।
रोड रेज अब केवल दो ड्राइवरों के बीच का झगड़ा नहीं रह गया — यह निर्दोष राहगीरों की जान ले रहा है। मसूरी रोड पर ब्रिगेडियर वीके जोशी की मौत इसकी सबसे ताजा और दिल दहला देने वाली मिसाल है।
पुलिस कई मामलों में त्वरित कार्रवाई कर रही है, लेकिन समस्या की जड़ गहरी है। जागरूकता अभियान, ट्रैफिक शिक्षा, सड़क पर धैर्य सिखाने वाले कार्यक्रम और सख्त कानूनी सजा ही इस बढ़ते खतरे को नियंत्रित कर सकते हैं।
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