मेरठ। स्मार्ट मीटर को लेकर पीवीवीएनएल अफसर भले ही कुछ भी कहते रहें दावे करते रहें, लेकिन हकीकत इसके एक दम उलट है। स्मार्ट मीटर लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। यह बात अफसर मानते भी हैं, लेकिन उसके बाद भी स्मार्ट मीटर अभियान पर विराम नहीं दिया जा रहा है। हालात यह हो गयी है कि स्मार्ट मीटर के नाम पर लोग अब मारने को दौड़ते हैं। ऐसा ही कुछ आज मोहनपुरी में हुआ जहां लोगों का गुस्सा स्मार्ट मीटर पर फूट पड़ा। इससे एक दिन पहले प्रदेश के बड़े व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल के नेतृत्व में स्मार्ट मीटरों को ऊर्जा भवन पर आग के हवाले किया गया था।
विशेष कैंप में हंगामा
शुक्रवार को विद्युत विभाग के विशेष कैंप में मीटर को लेकर फिर हंगामा हो गया। गुस्साई महिलाओं ने कैंप पर मौजूद अफसरों को चूड़ी भेंट कर दी जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। जिले में बड़े स्तर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम चल रहा है। जैसे-जैसे मीटर लगते जा रहे हैं वैसे-वैसे लोगों की शिकायतें बढ़ गई हैं। मोहनपुरी की महिलाएं पिछले काफी समय से विरोध दर्ज करा रही है। शुक्रवार को उनके सब्र जवाब दे गया और उन्होंने न्यू मोहनपुरी स्थित बिजली घर पर हंगामा कर दिया। लोगों को जगरूक करने के नाम पर पीवीवीएनएल के द्वारा शुक्रवार को न्यू मोहनपुरी स्थित बिजली घर पर विशेष कैंप लगाया गया था। जैसे ही मोहनपुरी की महिलाओं को इसकी भनक लगी, वह बिजली घर पहुंच गई और अधिकारियों का घेराव कर दिया। उनका केवल यही कहना था कि जल्द से जल्द उनके घर से स्मार्ट मीटर हटाया जाए। मौके पर मौजूद सुपरिटेंडेंट इंजीनियर अरशद खान ने बात करने की कोशिश की तो महिलाओं ने उन्हें चूड़ियां भेंट कर दी।
मोबाइल चलाता देख भड़की महिलाएं
बिजली घर पर महिलाओं की भीड़ लगी थी। हर किसी के हाथ में बिजली के बिल थे। सभी का पारा चढ़ा हुआ था। हंगामा के बीच विद्युत विभाग के अफसर अपने मोबाइल में व्यस्त हो गए। यह देख महिलाओं का पारा चढ़ गया। उन्होंने सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के हाथ से मोबाइल छीन लिया और चूड़ियां थमा दी। सूचना पर सिविल लाइन थाने की पुलिस भी बिजली घर पहुंच गई। पुलिस कर्मियों ने महिलाओं को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन महिलाओं ने उनकी भी नहीं सुनी। दोनों अफसरों को वहीं पर बंधक बना लिया और बिजली घर से बाहर नहीं आने दिया। करीब 4 घंटे तक बिजली घर पर हंगामा होता रहा।
इतना सा भरोसा चाहती थीं महिलाएं
हंगामा बढ़ता जा रहा था और राहत की कोई उम्मीद अफसरों को दिखाई नहीं दे रही थी। उन्होंने कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन महिलाएं मीटर हटाने पर अड़ी थीं। बाद में वह मांग करने लगी कि अफसर लिख कर दें कि बिल जमा ना होने पर 15 दिन तक बिजली नहीं कटेगी। वह सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर से लिखित गारंटी मांग रही थीं। लेकिन कोई अफसर परेशान महिलाओं को भरोसा देने को तैयार नहीं था।
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