मेरठ/ नगर निगम में फर्जी नियुक्तियों के मामले में साल २०१० में तत्कालीन नगरायुक्त डीके सिंह ने प्रमुख सचिव नगर विकास को आगाह किया था। उन्होंने फर्जी नियुक्तियों को लेकर एक पत्र भी प्रमुख सचिव को लिखा था। जिसमें उन्होंने फर्जी नियुक्तियों के लिए तब कुछ सभासदों, निगम के कर्मचारियों व पूर्व के नगरायुक्तों को कठघरे में खड़ा किया। ८ सितंबर २०१० को प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि उन्होंने १ मई को कार्यभार ग्रहण किया था। उनका ध्यान कई सभासदों व अन्य ने अनियमितताओं की ओर से दिलाया था। पत्र में बताया गया कि उन्होंने पूर्व नगरयुक्त संजय कृष्ण के द्वारा किए गए आदेशों को लेकर एक अदेश दिए थे कि उन्होंने जो आदेश दिए उनका क्रियान्वयन मेरे आदेशों के बगैर ना किया जाए। जो पत्रावलियां मांगीं गईं वो लिपिकों ने प्रस्तुत नहीं कीं। जब भी कोई पत्रावली मांगी जाती संबंधित लिपिक उसके पास पत्रावली ना होने की बात कहकर हाथ खड़े कर देते।
पत्र की मार्फत उन्होंने प्रमुख सचिव को यह भी अवगत कराया कि शासन के आदेश पर वह माह १९ जुलाई २०१० से २२ अगस्त २०१० तक प्रशिक्षण पर चले गए। जब प्रशिक्षण से लौटे तो उन्हें अवगत कराया गया कि नगरायुक्त संजय कृष्ण ने जिन कर्मचारियों को नियमित किया था उनको वेतन दे दिया गया। ऐसी पत्रावलियों को पुन. मांगा गया, जिस पर उपनगरायुक्त पीएन सिंह ने ऐसी पत्रावली अवलोकन के लिए भेजीं जिसमें ११ कर्मचारियों जिनको नियमित किया गया है का चार्ज लगाया गया था। प्रमुख सचिव को अवगत कराया गया कि जिन कर्मचारियों को नियमित किया गया, वो सभी संविदा कर्मचारी हैं। संविदा कर्मचारियों को नियमित कराए जाने का कोई शासनादेश नहीं है।
संविदा कर्मचारी जिन्हें नियमित किया गया
प्रमुख सचिव को भेजे गए पत्र के साथ उन संविदा कर्मचारियों की भी सूची प्रेषित की गयी है जिन्हें कोई शासनादेश ना होते हुए भी नियमित कर दिया गया। इन कर्मचारियों में मनोज कुमार निवासी प्रगति नगर, संजय, सतीश कुमार, शम्स आरिफ व राजेश कुमार नगर ( इन सभी को स्वास्थ्य अधिकारी एमपी सिंह ने नियमित किया।) महमूद अली इन्हें उपनगरायुक्त खेमचंद्र ने नियमित किया। नौशाद व नकुल वत्स को सुरेश चंद्र मिश्रा ने नियति किया। हरबीर सिंह व शाकेब खान इन्हें उपेन्द्र नाथ मिश्रा उपनगरायुक्त ने नियमित किया। राजेन्द्र कुमार सहायक अभियंता जल कल सतीश चंद शर्मा ने नियमित किया।
ना विज्ञापन ना चयन समिति
नगरायुक्त डीके सिंह ने बताया कि जिन संविदा कर्मचारियों को नियमित किया गया, उन प्रक्रिया के लिए ना तो कोई विज्ञापन निकाला गया और ना ही किसी चयन समिति का गठन किया। रिक्त पदों पर सीधी नियुक्ति कर दी गयी। प्रदेश भर में मेरठ नगर निगम का यह इकलौता मामला है जहां इस प्रकार से नियुक्ति की गयी हों। ज्यादातर कर्मचारी पूर्व कर्मचारियों के रिश्तेदार या संतान हैं। उदाहरण के लिए इनमें नकुल वस्त व मेहराज का मामला ऐसा ही है। मेरठ नगर निगम में जिस प्रकार सेये नियुक्तियां की गयी हैं। शासन के स्तर से ऐसी कोई नीति नहीं बनायी गयी है। सबसे आपत्तिजनक यह कि वरिष्ठ अधिकारी होते हुए भी कनिष्ठ अधिकारी की कलम से संविदा कर्मचारियों को नियमित किया गया। प्रमुख सचिव को लिखे गए पत्र में नगरायुक्त डीके सिंह ने सभी नियुक्तियां निरस्त किए जाने की संस्तुति की।
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