नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हर बार ईरान को हल्के में लेना महंगा पड़ रहा है। और ईरान बार-बार यूएस पर भारी पड़ रहा है। इस बार बातचीत के मसले पर ईरान ने यूएस को घुटनों पर ला दिया है। बार-बार कहने के बाद भी ईरान को ट्रंप बातचीत के लिए राजी नहीं कर सके और बाद में उन्होंने खुद ही सीजफायर बढ़ाए जाने का एलान कर दिया। इसको दुनिया ईरानी की बड़ी जीत के रूप में देख रही है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की धमकियों के बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए तैयारी की घोषणा की है। ईरानी सेना (खातम अल-अनबिया मुख्यालय) ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हमले का तत्काल और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी जारी रखी है और समझौते की मांग की है। अमेरिका और उसके मित्र देशों ने यदि हमले की हिमाकत की तो ईरान भी तैयार बैठा है। खाड़ी में अमेरिका के मित्र देशों के बेस ही नहीं बल्कि उनके तेल व गैद उत्पाद केंद्रों पर भी ईरान अपनी मिसाइलें भेजेगा। यह भी संभव है कि चौंकाते हुए ईरान इस बार बेलिस्टिक मिसाइलें भेज दी। जानकारों की मानें तो ईरान के पास बेलिस्टिक मिसाइलों का भी जखीरा है। इस लड़ाई में उसके मददगार माने जा रहे चीन व रूस तथा उत्तर कोरिया ने काफी बड़ी मदद ईरान की लड़ाई के सोजासामान को लेकर की है। माना जा रहा है कि इसी वजह से सीफफायर की मियाद बढ़ाने पर अमेरिका को मजबूर होना पड़ा है। लेकिन सबसे बड़ा अपडेट ईरान का किसी भी प्रकार की बातचीत से इंकार और उस पर अड़े रहना है। अमेरिका के इतिहास में इतनी जयादा बेइज्जति इस प्रकार से संभवत किसी राष्ट्रपति की नहीं हुई जितनी की डोनाल्ड ट्रंप की। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा कि अगर खाड़ी के पड़ोसी देशों के क्षेत्र से हमले किए जाते हैं तो मध्य पूर्व में तेल उत्पादन को निशाना बनाया जा सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन माना जा रहा है, और कमांडरों का कहना है कि सेना किसी भी तरह के तनाव बढ़ने पर जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ईरानी कमांडरों ने कहा है कि उनकी सेना ‘ट्रिगर पर है और किसी भी आक्रामकता का जोरदार जवाब देने के लिए तैयार है। बातचीत ना होने से बौखलाया अमेरिका अब ईरान की और कड़ी घेराबंदी पर उतर आया है। अमेरिका ने ईरान के हथियार कार्यक्रमों से जुड़े नए प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि यूरोपीय संघ अपने स्वयं के उपायों का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्ट्रेट हार्मूज बंद होने से पूरी दुनिया में ईधन की भारी कमी पड़ रही है। केवल ईधन ही नहीं बल्कि दुनिया में खाद्यान का भी सकंट गहराने के आसार नजर आ रहे हैं। तमाम देश यही चाहते हैं कि स्ट्रेट हार्मूज खोला जाए लेकिन इस समुद्री रास्ते को खोलने के लिए अमेरिकी तरीके किसी को मंजूर नहीं।
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