मेरठ। राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने केंद्र सरकार की टीओडी नीति जिसको उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पहली ही अंगीकार कर चुकी है, उसका लाभ मेरठ छावनी को ना मिल पाने का मुद्दा उठाते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। डा. वाजपेयी ने पत्र में कहा है कि देश में शहरी परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु मेट्रो एवं आरआरटीएस परियोजनाओं के साथ टीओडी नीति लागू की गई है। इस नीति के अंतर्गत मेट्रो एवं आरआरटीएस कॉरिडोर के दोनों ओर स्थित क्षेत्रों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाणिज्यिक उपयोग में 30 प्रतिशत तथा आवासीय उपयोग में 70 प्रतिशत तक अतिरिक्त अनुमन्यता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। दरअसल राज्यसभा सदस्य डा. वाजपेयी का प्रयास है कि रक्षा उत्पादक इकाई की मेरठ में स्थापना हो ताकि मेरठ का नाम देश में रक्षा उत्पाद करने वाले शहरों में सबसे अग्रणीय हो।
राज्य सरकारें कर रही हैं लागू
सरकार को मेरठ छावनी के बाजारों से भारी भरकम जीएसटी की रकम मिलती है, लेकिन इस रकम में से एक पाई सरकार की ओर से कैंट बोर्ड को नहीं मिलती जिससे समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि यह नीति केंद्र सरकार द्वारा निर्मित है तथा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भी इसे स्वीकार कर लागू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी इस नीति को अंगीकृत किया जा चुका है। किन्तु मेरठ नगर में आरआरटीएस कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले कैंटोमेंट क्षेत्र में इस नीति का लाभ वर्तमान में प्रदान नहीं किया जा रहा है। चूंकि यह क्षेत्र रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन आता है, अत: यहां टीओडी नीति का अनुपालन अपेक्षित रूप से नहीं हो पा रहा है। डा. वाजपेयी ने पत्र में कहा है कि इस विषय में समुचित विचार कर आवश्यक निर्णय लेते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा करें, ताकि उक्त क्षेत्र में भी टीओडी नीति के लाभ नागरिकों को प्राप्त हो सकें।
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि मेरठ छावनी में इस नीति के तहत मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर के आसपास नियोजित विकास को बढ़ावा देने हेतु वाणिज्यिक उपयोग में 30′ और आवासीय उपयोग में 70′ अतिरिक्त अनुमन्यता दी जाती है। छावनी परिषदों को वित्त आयोग की राशि में हिस्सेदारी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छावनी क्षेत्रों में भी नागरिक जीएसटी और आयकर का भुगतान करते हैं, परंतु उन्हें कर राजस्व से कोई हिस्सा नहीं मिलता। देश में कुल 62 छावनी परिषदें हैं। मेरठ में प्रतिवर्ष लगभग ?3147 करोड़ जीएसटी के रूप में एकत्र होता है। सांसद ने आग्रह किया कि इन परिषदों का हिस्सा सीधे केंद्र से आवंटित कर भेजा जाए।
राजनाथ का डा. वाजपेयी को पत्र
केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डा. वाजपेयी के पत्र के बाद उत्तर देते हुए एक पत्र भेज कर इस मामले की जांच की जानकारी दी है। डा. वाजपेयी ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी पत्रों का संज्ञान लेते हुए उत्तर दिया कि मामलों की जांच करवाई जा रही है।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पत्र को मंत्रालय को अग्रेषित कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। डॉ. बाजपेयी की पहल से छावनी परिषदों, मेरठ के नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती मिलेगी। उनकी मांगें स्थानीय विकास और राष्ट्रीय हित दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारा राज्य सभा में मेरठ में नई रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना, टीओडी नीति का क्रियान्वयन और छावनी परिषदों को वित्त आयोग की राशि में हिस्सेदारी हेतु विषय उठाया था। इन मुद्दों को आधार बनाकर रक्षा मंत्री तथा रक्षा राज्य मंत्री को पत्र लिखकर मांग रखा जिसके जवाब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने पत्र के माध्यम से अवगत करवाया कि सभी पत्रों का संज्ञान लेते हुए मामलों की जांच करवाई जा रही है तथा रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पत्र को मंत्रालय को अग्रेषित कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
रक्षा सामग्री उत्पादन इकाइयों की स्थापना कराएं
रक्षामंत्री से आग्रह किया गया है कि मेरठ में रक्षा सामग्री उत्पादन करने वाले इकाइयों लगायी जाएं। उन्होंने कहा कि मेरठ का ऐतिहासिक महत्व स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान और यहाँ के कैन्टोनमेंट क्षेत्र की सामरिक उपयोगिता इसे और भी सुदृढ़ और प्राथमिकता योग्य बनाती है। मुरादनगर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री पूर्व में महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई रही है, जो अब शिथिल स्थिति में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत आज एक सशक्त रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है, जो राष्ट्रीय गर्व का विषय है। मेरठ में नई रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना से न केवल स्थानीय उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह भारत की रक्षा क्षमताओं को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा। यह पहल क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
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