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अटे हुए नाले नालियां परोस रही हैं बीमारियां

अटे हुए नाले नालियां परोस रही हैं बीमारियां

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अटे हुए नाले नालियां परोस रही हैं बीमारियां
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महानगर के पुरानी आबादी वाले इलाकों में सफाई का बुरा हाल
दूषित पानी पीने को मजबूर हैं लोग, एनएसए का नियमित सफाई का दावा

मेरठ। एक तो गर्मी का मौसम उस पर नाले नालियों की सफाई ना होने की वजह से शहर की पुरानी घनी आबादी वाले इलाकों में बीमारियों फैलने का खतरा पैदा हो गया है। गंदगी की वजह से इन दिनों घर-घर में बुखार के रोगी हो गए हैं। सबसे बुरा हाल कोतवाली, लिसाड़ीगेट, नौचंदी, ब्रह्मपुरी, देहलीगेट और टीपीनगर सरीखे इलाकों में पड़ने वाले मोहल्लों का है। यहां नगर निगम का सफाई अमला नियमित रूप से सफाई नहीं करा पा रहा है जिसकी वजह से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इन इलाकों में सफाई व्यवस्था की कमी एक गंभीर समस्या है, जो बीमारियों के फैलने का बड़ा खतरा पैदा कर रही है। घनी आबादी, संकरी गलियां, पुरानी नालियां और सीवर सिस्टम के कारण कचरा जमा होना, नालियां चोक होना और गंदा पानी घरों तक पहुंचना आम शिकायत है।
आबादी ज्यादा स्टाफ कम
नगर निगम में 24 लाख आबादी पर सिर्फ करीब 3100 सफाई कर्मचारी हैं, जो पर्याप्त नहीं है। कई पुराने इलाकों में कचरा संग्रह नियमित नहीं होता, जिससे गलियों में कूड़े के ढेर लग जाते हैं। हड़ताल या कर्मचारियों की कमी के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है। पुरानी नालियां जाम रहती हैं, बारिश में पानी भर जाता है और गंदगी फैलती है। कैलाशपुरी जैसे इलाकों में डेरियों का गोबर और कचरा नालियों को चोक कर देता है। कई इलाकों में पाइपलाइन में सीवर का मिश्रण हो जाता है, जिससे हैंडपंप या टैप का पानी दूषित रहता है। इससे जलजनित बीमारियां बढ़ती हैं।
आए दिन होते हैं हंगामे
मेडिकल की जय भीमनगर कालोनी में दूषित पानी की वजह से लोगों ने जमकर हंगामा किया था। हंगामे की सूचना पर मौके पर महापौर व अपर नगरायुक्त पहुंचे थे। पेयजल की पाइप लाइन बदलवाने का वादा भी करके आए थे, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। आज भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इलाके के लोगों ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, ऐसे में दूषित पानी पानी के सेवन से बीमारियां फैल रही हैं। गंदगी की वजह से हंगामे की जहां तक बात है तो आए दिन हंगामे हो रहे हैं। अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और वादा कर लौट जाते हैं यह बात अलग है कि समस्या जस की तस बनी रहती है।
इन बीमारियों की चपेट में शहर
सफाई व्यवस्था मुकम्मल ना होने की वजह से शहर के ज्यादातर इलाकों में डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, उल्टी दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में लोग आ रहे हैं। इसकी वजह नाले नालियों में पानी का रूक जाना है। उससे मच्छर पनप रहे हैं। तमाम ऐसे लोगों है जिन्होंने इंफेक्शन की शिकायत की है।
इससे हो सकता है सुधार
नगर निगम का स्टाफ अपना काम नहीं कर रहा है यह बात समझ में आती है, लेकिन शहर के इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जो नहीं करना चाहिए वो कर रहे हैं। कचरा अलग-अलग करें, घरेलू कंपोस्टिंग अपनाएं, नालियों में कचरा न फेंकें। पुरानी नालियों/सीवर की मरम्मत, सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना, नियमित मॉनिटरिंग और जुर्माना व्यवस्था को सख्त करना जरूरी है। बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, सीवर ट्रीटमेंट और जागरूकता अभियान से स्थिति सुधर सकती है।
वर्जन
नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमर कुमार का कहना है कि नियमति रूप से सफाई करायी जा रही है। लोग नाले नालियों में घर का कचरा फैंक देते हैं। इससे कुछ परेशानियां हो सकती हैं। यदि किसी खास इलाके में ज्यादा समस्या है तो वह उनकी जानकारी में लायी जा सकती है। वहां अलग से गैंग लगाकर सफाई करा दी जाएगी।
नगरायुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि महानगर की सफाई व्यवस्था की नियमित रूप से मानिटरिंग की जा रही है। सेनेट्री इंस्पेक्टरों को जिम्मेदारी दी गयी है। उनके काम की भी मानिटरिंग की जा रही है।

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