पत्रकार शाheen खान और नफीसा खान से कथित मारपीट की खबर पूरी तरह से गायब, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तूफान
नई दिल्ली। नेशनल टीवी चैनलों जो खुद को (मेनस्ट्रीम मीडिया) कहते नहीं अघोत, पर साकेत थाने में पत्रकार शाheen खान और नफीसा खान के साथ हुई कथित मारपीट की खबर पूरी तरह से गायब कर दी गयी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म महिला पत्रकारों से थाने में पुलिस की मारपीट को लेकर जहां सोशल मीडिया पर तूफान आया हुआ है वहीं दूसरी ओर यह खबर न दिखने या गायब होने को लेकर मीडिया विश्लेषकों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और दर्शकों द्वारा अलग-अलग कारण और तर्क दिए जा रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि मेनस्ट्रीम टीवी मीडिया का यह रुख प्रेस स्वतंत्रता के प्रति उदासीनता को दर्शाता है, जबकि पुलिस समर्थकों और चैनलों के अपने संपादकीय विवेक के अनुसार, बिना पूर्ण आधिकारिक जांच या सीसीटीवी फुटेज के इस तरह के संवेदनशील और गंभीर आरोपों को सीधे नेशनल टीवी पर प्रसारित करना जल्दबाजी माना जाता है। कुछ का कहना है कि इसी के चलते दुनिया भर की प्रेस रेकिंग में भारत का मीडिया अंतिम पायदान पर खड़ा किया जाता है।
ये बतायी जा रही वजह
पीड़ित पत्रकार शाहीन और नफीसा ‘4PM न्यूज़ नेटवर्क’ (एक स्वतंत्र डिजिटल/यूट्यूब न्यूज़ चैनल) से जुड़ी हैं। मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि नेशनल टीवी चैनल अक्सर स्वतंत्र डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी खबरों या उनके पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को उतनी प्राथमिकता नहीं देते, जितनी वे अपने खुद के या बड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क के पत्रकारों को देते हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल
यह खबर सोशल मीडिया (X, फेसबुक, इंस्टाग्राम) और कुछ प्रमुख समाचार वेबसाइटों (The Hindu, The Wire) पर बहुत तेजी से वायरल हुई है। चूंकि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) और अन्य पत्रकार संगठनों ने जांच की मांग की है, इसलिए इसे ग्राउंड रिपोर्टिंग और डिजिटल स्पेस में तो जगह मिली है, लेकिन टीवी स्क्रीन के एजेंडे (जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे या राजनीतिक बयानबाजी) इससे अलग रहे हैं।
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