22 मंत्रियों (49 प्रतिशत) ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की थी
नई दिल्ली/लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी के कैबिनेट के 22 मंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ मुकदमें दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के 22 मंत्रियों (49 प्रतिशत) ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की थी। इसके अलावा विश्लेषण किए गए 45 मंत्रियों में से 39 (87%) करोड़पति हैं। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ वर्तमान में कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के किसी भी वर्तमान मंत्री के चुनावी हलफनामे में खुद पर हत्या (Murder – IPC 302) या बलात्कार (Rape – IPC 376) का सीधा मुकदमा दर्ज होने की घोषणा नहीं है। हालांकि एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि हालाँकि, कैबिनेट के 20 मंत्रियों (44%) पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।ये है स्टेटस
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएम समेत कुल 45 मंत्री ऐसे हैं जिन पर मामले दर्ज हैं। इनमें से 22 मंत्रियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। गंभीर आपराधिक मामलों की यदि बात करें तो 20 मंत्रियों पर गंभीर किस्म के आपराधिक मामले (जैसे हत्या का प्रयास आदि) दर्ज हैं। इसके अलावा विश्लेषण किए गए 45 मंत्रियों में से 39 (87%) करोड़पति हैं।इन पर दर्ज हैं मुकदमें
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट की मानें तो जिन पर मुकदमें दर्ज हैं उनमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, भूपेन्द्र चौधरी, दयाशंकर सिंह, मयंकेश्वर शरण सिंह, राकेश सचान, कपिल देव अग्रवाल, रविन्द्र जायसवाल, योगेन्द्र उपाध्याय, अनिल राजभर, गिरीश चंद यादव, मनोहर लाल मन्नू, डा. साेमेन्द्र तोमर, संजय गंगवार, दिनेश खटीक, ब्रजेश सिंह, सतीश चंद शर्मा और सुरेश राही।इस तरह के मुकदमें हैं दर्ज
एडीआर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हत्या का प्रयास:- कई प्रमुख मंत्रियों पर चुनावी या राजनीतिक विवादों के चलते हत्या के प्रयास के मुकदमे दर्ज हैं। अपहरण व दंगा भड़काना:– कुछ मंत्रियों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने, गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होने (दंगा) या डराने-धमकाने से संबंधित धाराएं हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध:– वर्तमान मंत्रियों में से किसी पर भी बलात्कार (Rape) जैसी गंभीर धारा का मुकदमा घोषित नहीं है।विधायकों और मंत्रियों में अंतर
वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीते कुल 51% विधायकों (MLAs) पर आपराधिक मामले थे, जिनमें से कुछ विधायकों पर हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध (जैसे छेड़छाड़ या अन्य अपराध) के मामले दर्ज थे। लेकिन मंत्रिमंडल (Ministers) का गठन करते समय ऐसे गंभीर मामलों (विशेषकर रेप या हत्या) वाले विधायकों को मंत्री पद की सूची में शामिल नहीं किया गया था।प्रमुख राजनीतिक दलों के अनुसार दागी विधायकों की संख्या
एडीआर (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न पार्टियों के विधायकों की स्थिति नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है
| राजनीतिक दल (Party) | कुल विजयी विधायक | आपराधिक मामले वाले विधायक | गंभीर आपराधिक मामले वाले विधायक |
|---|---|---|---|
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 255 | 111 (44%) | 90 (35%) |
| समाजवादी पार्टी (SP) | 111 | 71 (64%) | 48 (43%) |
| राष्ट्रीय लोक दल (RLD) | 8 | 7 (88%) | 5 (63%) |
| सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) | 6 | 4 (67%) | 4 (67%) |
| निषाद पार्टी (NISHAD) | 6 | 4 (67%) | 4 (67%) |
| अपना दल (सोनेलाल) | 12 | 3 (25%) | 2 (17%) |
| जनसत्ता दल लोकतांत्रिक | 2 | 2 (100%) | 2 (100%) |
| कांग्रेस (INC) | 2 | 2 (100%) | 2 (100%) |
| बहुजन समाज पार्टी (BSP) | 1 | 1 (100%) | 1 (100%) |
एडीआर की आधिकारिक वेबसाइट (Myneta):
एडीआर द्वारा संचालित MyNeta – National Election Watch पोर्टल पर जाएं। यहाँ ‘Uttar Pradesh’ विकल्प को चुनकर आप सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के मंत्रियों और विधायकों की पूरी सूची, उनकी संपत्ति और उन पर चल रहे मुकदमों की स्कैन कॉपी सीधे देख सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का पोर्टल:
आप भारतीय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जाकर उम्मीदवारों द्वारा नामांकन के समय जमा किया गया ‘Form 26’ (शपथ पत्र/Affidavit) डाउनलोड कर सकते हैं। इस कानूनी दस्तावेज में पुलिस स्टेशन का नाम, एफआईआर (FIR) संख्या और लगी हुई सभी धाराएं (IPC Sections) स्पष्ट रूप से दर्ज होती हैं।
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