ऋषिकेश के भाई अभिषेक का आरोप उसे हॉस्टल रूम देने से मना कर दिया, उसे लैब और अकादमिक स्तर पर भी अलग-थलग (Isolate) कर दिया
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली में 22 अगस्त 2026 को एमएससी फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरकर हुई मौत ने देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को लेकर सीजेपी के अध्यक्ष अभिजीत दीपके सरकार और शिक्षा का सिस्टम तबाह करने वालों पर जमकर बरसे हैं। अभिजीत दीपके ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसमें “पूरी तरह आमूलचूल बदलाव” (Complete Overhaul) करने की मांग की है। उनका कहना है कि देश की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह तबाह हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आईआईटी जैसे संस्थानों की गिनती देश के सबसे बेहतरीन और शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में होती है। अगर देश के सबसे अच्छे संस्थानों का यह हाल है, तो यह बेहद चिंताजनक है। दीपके ने आरोप लगाया कि इन संस्थानों में छात्रों को उनके संघर्षों और समस्याओं के साथ अकेला छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अलग-थलग करने के बजाय उन्हें प्रशासनिक और मानसिक समर्थन (Support) की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों को एक ऐसा शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए जहां वे खुद को सुरक्षित महसूस करें, उनकी बात सुनी जाए और वे अपने भविष्य को लेकर आशान्वित (Hopeful) रह सकें। अभिजीत दीपके और उनकी सीजेपी (CJP) टीम ने आईआईटी दिल्ली के प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई है और सोशल मीडिया पर ‘Justice for Rishikesh’ अभियान का समर्थन किया है।
ये हुआ
आईआईटी दिल्ली में 22 अगस्त 2026 को एमएससी फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरकर हुई मौत ने देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार और छात्रों के अनुसार, ऋषिकेश कुछ समय से मानसिक तनाव, एंग्जायटी और हॉस्टल न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। ऋषिकेश के भाई अभिषेक का आरोप है कि ऋषिकेश डिप्रेशन और एंग्जायटी (Anxiety) से जूझ रहा था। प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद, जिम्मेदारी से बचने के लिए उसे हॉस्टल रूम देने से मना कर दिया गया ताकि वह परिसर से बाहर रहे। छात्रों का आरोप है कि उसे लैब और अकादमिक स्तर पर भी अलग-थलग (Isolate) कर दिया गया। इस घटना के बाद से आईआईटी दिल्ली परिसर में लगातार विरोध-प्रदर्शन और कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं।
‘Justice for Rishikesh’
‘Justice for Rishikesh’ (ऋषिकेश के लिए न्याय) अभियान आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के छात्रों द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक विरोध-प्रदर्शन और सोशल मीडिया आंदोलन है। यह आंदोलन 22 अगस्त 2026 को एमएससी फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत (छठी मंजिल से गिरने) के बाद न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। छात्र इस मामले की पूरी तरह से स्वतंत्र, पारदर्शी और बाहरी जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग के आगे झुकते हुए आईआईटी दिल्ली ने दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में एक बाहरी समिति का पुनर्गठन किया है। छात्र एसोसिएट डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) और हॉस्टल मैनेजमेंट के अधिकारियों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक ये अधिकारी पद पर रहेंगे, निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
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