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नहीं होगी पेट्रोल-डीजल की दिक्कत होर्मुज संकट का भारत ने निकाला तोड़

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मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने का असर अब भारत समेत दुनिया भर में दिखने लगा है। भारत में एलपीजी संकट के बाद अब कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा मार्ग है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। कई देशों ने एनर्जी इमरजेंसी घोषित कर दी है, जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। भारत में भी इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है।

भारत ने खोजा विकल्प

इस संकट से निपटने के लिए भारत ने वैकल्पिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। रूस से बड़े स्तर पर कच्चा तेल मंगाने का फैसला लिया गया है। भारत ने रूस से करीब 6 करोड़ टन (60 मिलियन टन) कच्चा तेल खरीदने का ऑर्डर दिया है, जिसकी सप्लाई अप्रैल तक भारत पहुंचने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि यह खरीद फरवरी के मुकाबले लगभग दोगुनी है। भारत ने यह तेल प्रति बैरल 5 से 15 डॉलर के प्रीमियम पर बुक किया है, जो मौजूदा संकट को देखते हुए जरूरी कदम माना जा रहा है।

अमेरिका ने दी अस्थायी राहत

अमेरिका और पश्चिमी देशों ने पहले यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर तेल प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, होर्मुज संकट के बाद अमेरिका ने रूस और ईरान के तेल पर लगी कुछ पाबंदियों को अस्थायी तौर पर हटा दिया है। इससे भारत को रूस से तेल आयात बढ़ाने में मदद मिली है।

भारत बना बड़ा खरीदार

भारत इस मौके का फायदा उठाते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा रहा है और वैश्विक बाजार में एक बड़े खरीदार के रूप में उभर रहा है। वहीं, बढ़ती मांग के चलते रूस ने अपने तेल पर दी जाने वाली छूट को कम कर दिया है, जिससे उसे भी अच्छा मुनाफा हो रहा है।

कई देशों से आयात जारी

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत 40 से अधिक देशों से तेल आयात कर रहा है, जिनमें सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं।

आम लोगों पर असर

देश में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और गैस की किल्लत इस संकट की गंभीरता को दिखा रही हैं।

 
जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से नहीं खुलता, तब तक वैश्विक ऊर्जा संकट बने रहने की आशंका है। ऐसे में भारत द्वारा उठाए गए वैकल्पिक कदम फिलहाल राहत देने वाले साबित हो सकते हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है।

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