मेरठ/केंद्रीय वित्त आयोग विकास के नाम पर जो रकम राज्य सरकारों को भेजता है उसमें देश के छावनी क्षेत्र समाहित नहीं होते, जबकि देश के छावनी इलाकों से तमाम करों की मद में बड़ी रकम एकत्र की जाती है। देश की ६२ छावनियों को जो राशि भेजी जाती है केंद्र सरकार वह रकम सीधे संबंधित छावनी को भेजे ताकि उस छावनी के नागरिक क्षेत्र का विकास संभव हो सके। यह मांग भाजपा नेता व राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भेजे पत्र में की है। डा. वाजपेयी ने पत्र में कहा है कि राज्यों में संकलित केंद्रीय करों का लगभग ४५ फीसदी भाग राज्यों का वापस किया जाता है। तत्पश्चात राज्य सरकारें उस राशि का वितरण अपने अधिनस्थ स्थानीय निकायों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत व जिला पंचायत को करती हैं।
देश में ६२ छावनी परिषद हैं और सभी की स्थिति समान है। मेरठ छावनी क्षेत्र से जीएसटी की मद में ३१४७ करोड़ की रकम अकेले जीएसटी की मद में एकत्रित होते हैं। इस राजस्व का उचित अंश क्यों ना छावनी परिषदों को प्रदान किया जाए। डा. वाजपेयी ने पत्र में यह भी अवगत कराया है कि इस संबंध में वह वित्त मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं और इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठा चुके हैं। इस विषय में वित्त मंत्रालय की अनुशंसाओं के माध्यम से छावनी परिषद को उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
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