नई दिल्ली। राहुल गांधी और भाजपा के बीच राजनीतिक घमासान की तपिश अब RSS को भी झुलसाने लगी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 19 सितंबर 2026 को इंदौर में युवाओं और छात्रों को केंद्रित कर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा और देश के मौजूदा ‘सिस्टम’ पर तीखे सवाल उठाए। इंदौर के अपने भाषण में राहुल गांधी ने देश के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे पर हमला करते हुए मोहन भागवत का नाम उन शीर्ष लोगों में शामिल किया जो उनके अनुसार इस समय ‘सिस्टम’ को नियंत्रित या प्रभावित कर रहे हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि आरएसएस प्रमुख ने अपनी विचारधारा और शिक्षण संस्थानों को चलाने के लिए बड़े स्तर पर धन व प्रभाव का इस्तेमाल किया है।
संघ भाजपा के रिश्तों में तपिश
संघ प्रमुख मोहन भागवत का चंद रोज पहले दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें वह कह रहे हैं कि कोई भी खुद को सर्वशक्तिमान या हमेशा कायम होने का भ्रम ना पाले। वक्त पर सभी अर्श से फर्श पर आते है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात को भी रेखांकित कर रहे हैं कि लोकसभा चुनावों के बाद से भाजपा और आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व के बीच रिश्तों में एक प्रकार की सूक्ष्म तनातनी देखी गई है। जहाँ एक तरफ संघ अपनी स्वतंत्र छवि और वैचारिक नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, वहीं राहुल गांधी के तीखे हमलों के कारण संघ को भी भाजपा और कांग्रेस की इस सीधी सियासी जंग के बीच में आना पड़ रहा है। ही वजह है कि विपक्ष इसे भाजपा की “घबराहट” बता रहा है, जबकि संघ और भाजपा इसे युवाओं को राष्ट्रवाद और विकास से जोड़ने का अपना नियमित कार्यक्रम कह रहे हैं।
भाजपा को चाहिए अंध भक्त
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस (BJP-RSS) का सिस्टम सवाल पूछने वाले खोजी छात्रों के बजाय ‘अंधभक्त’ पैदा करना चाहता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार में शिक्षा के बजट में कटौती की गई है और संस्थाओं पर राजनीतिक कब्जा कर लिया गया है। कांग्रेस का दावा है कि इस सफल कार्यक्रम और युवाओं की भारी भीड़ से भाजपा सरकार घबरा गई है।
भाजपा ने किया खारिज
इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच भारी राजनीतिक घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 19 सितंबर 2026 को इंदौर में छात्रों के साथ किए गए इस संवाद कार्यक्रम के बाद, भाजपा ने इसे पूरी तरह ‘प्रायोजित’ (Staged) और जनता को गुमराह करने वाला करार दिया है। भाजपा ने प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना और परीक्षा सुधार कानूनों का हवाला देकर अपनी नीतियों को छात्र-हितैषी बताया है।
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