सडके में गड्ढे या गड्ढों में सड़क अनुमान लगाना होता जाता है बेहद मुश्किल, पीक आवर में लग जाता है भयंकर जाम
मेरठ। बेगमपुल से लेकर लालकुर्ती जीरो माइल्स चौराहे तक की छोटी सी दूरी में सड़क गड्ढाें में है या गड्ढे सड़क में है यह पता हीं नहीं चल पता, क्योंकि इतनी छोटी सी दूरी की सड़क पर रैपिड रेल के बेगमपुल स्टेशन के सामने साठ से ज्यादा गड्ढे हैं। सड़क पर कुछ की गहरायी तो दो फुट तक है। जब इतनी ज्यादा गहरायी होगी तो जरा अंदाजा लगा लीजिए कि उसमें जिस वाहन की पहिया चला जाएगा उसकी क्य हालत होगी और जो सवारियां उस पर बैठी होंगी उनका क्या हश्र होगा। एनसीआरटीसी ने जब दावा किया था कि रैपिड रूट पर जितनी भी सड़क हैं उनका रखरखाव का काम उनकी ही कार्यदायी संस्थाएं किया करेंगी। मसलन रैपिड रूट की सभी सड़कों के रखरखाव का जिम्मा एनसीआरटीसी को होगा, लेकिन रखरखाव के नाम पर एनसीआरटीसी किस प्रकार से जिम्मेदारी निभा रही है इसका अंदाजा बेगमपुल चौराहे से लेकर जीरो माइल्स चौराहे की रोड पर साठ से ज्यादा गड्ढों को देखकर लगाया जा सकता है और इस इलाके के सड़क की बहदाली से अफसरों को रूबरू कराने का काम बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने किया। उन्होंने ही इसका पूरा डाटा जमा कर मंडलायुक्त व एनसीआरटीसी अफसरों को भेजा। उन्होने बताया कि रोड की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि तमाम ऐसे वाहन चालक हैं जिन्होंने इस ओर से आना जाना ही बंद कर दिया है। जो लोग इस ओर से होकर जाया करते थे वो अब वैकल्पिक रास्तों से होकर जाते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रैपिड के बेगमपुल स्टेशन के बाहर वाली सड़क कितनी बुरी दशा में है।
हादसों को दे रहे न्यौता
बेगमपुल चौक से लेकर जीरो माइल यानी नमो भारत स्टेशन के गेट नंबर एक, दो, चार व तीन तक पूरी सड़क गड्ढों की भेंट चढ़ चुकी है। स्टेशन के अंदर अत्याधुनिक चमक है तो गेटों के ठीक बाहर निकलते ही विशाल गड्ढे। यह तस्वीर उस विकास के दावे पर सीधा तंज है, जिसमें लोग दिल्ली से मेरठ तक की दूरी हाईटेक ट्रेन से सरपट तय करते हैं लेकिन जैसे ही प्लेटफॉर्म से उतरकर स्टेशन के बाहर आते हैं, उन्हें गड्ढों से जूझना पड़ता है। सबसे बुरी स्थिति रैपिड स्टेशन के आसपास की है, जहां चारों गेटों के ठीक सामने इतने गहरे गड्ढे बन चुके हैं कि जरा सी जल्दबाजी किसी यात्री को दुर्घटना का शिकार बना जाती है। दिन ढलने के बाद शाम के अंधेरे में ये गड्ढे और खतरनाक हो जाते हैं और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ा देते हैं। यह सड़क एनसीआरटीसी के अधीन है और इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी उसी की है। इसकी मरम्मत उस समय हुई थी जब रैपिड का शुभारंभ किया गया था। आरटीआई एक्टिविस्ट पुनीत शर्मा ने बताया कि हो यह रहा है कि अफसर एक दूसरे पर ढीकरा फोड़ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि एनसीआरटीसी की जिम्मेदारी है, एनसीआरटीसी के अफसरों को सुध लेने की फुर्सत नहीं। लगता है उन्हें किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
केवल बेगमपुल ही नहीं
सड़कों की बुरी दशा की यदि बात करें तो केवल बेगमपुल की सड़क ही बदहाल नहीं हैं। शहर में बाकि जगह जहां से भी रैपिड का रूट होकर जा रहा है वहां सड़क की हालत बहुत अच्छी नहीं है। दअरसल रैपिड रूट की सड़क सबसे ज्यादा डेमेज बारिश के मौसम में हुईं, डेमेज हो चुकी सड़क से होकर जब भारी ट्रैफिक गुजरता है तो वह और भी ज्यादा डेमेज हो जाती हैं।
ये दी गयी सफाई
इस संबंध में एनसीआरटीसी के पीआरओ पुनीत बत्स ने बताया कि हाल में हुई भारी बरसात के कारण बेगमपुल स्टेशन के सामने की सड़क के कुछ हिस्से में गड्ढे हो गए हैं, जिसकी वर्तमान में एनसीआरटीसी द्वारा अस्थायी मरम्मत की जा रही है। बरसात के मौसम के बाद इसको स्थायी रूप से ठीक कराया जाएगा। इस पूरी सड़क को पीडब्ल्यूडी को सौंपने की प्रक्रिया काफी समय से चल रही है जिसे जल्द ही पूर्ण कर लिया जाएगा।
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