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कार्रवाई के बजाए फोन कर रहे हैं अफसर

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कार्रवाई के बजाए फोन कर रहे हैं अफसर
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कब्जा ही नहीं किया, बल्कि अफसरों को चुनौती देते हुए वहां अवैध रूप से पक्का निर्माण

मेरठ। सरकारी जमीन पर भूमाफिया के अवैध कब्जे के मामले में बजाए खुद आगे बढ़कर कार्रवाई करने के सिस्टम को चलाने वाले अफसर जिस शख्स से सरकारी जमीन को भूमाफिया से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया, अब उसके साथ फोन-फोन खेलने पर उतर आए हैं। मामला हस्तिनापुर के गांव समसपुर का है जहां सरकारी जमीन पर दबंग भूमाफिया ने कब्जा कर लिया। केवल कब्जा ही नहीं किया, बल्कि अफसरों को चुनौती देते हुए वहां अवैध रूप से पक्का निर्माण तक कर डाला। अवैध कब्जों व निर्माणों के खिलाफ आस्तीन चढ़ाकर कार्रवाई करने की केवल बातें करने वाले अफसर मामले को संज्ञान में लिए जाने के बाद भी जब कार्रवाई का साहस नहीं जुटा सके तो शिकायत करने वाले ने एक खत सीएम योगी को भेज दिया। सीएम योगी को खत जाने के बाद अफसरों की नींद टूटी। लखनऊ ने स्थानीय अफसरों से मामले पर रिपोर्ट तलब कर ली। इतना ही नहीं लखनऊ में बैठे सीएम योगी के अफसर भी एक्शन मोड में आ गए। शिकायत करने वाले के पास दनादन फोन आने शुरू हो गए।

शिकायत पर आए फोन

लखनऊ और मेरठ में सिस्टम को संभालने वाले अफसरों के फोन तो पहुंचे, लेकिन शिकायत करने वाले का कहना है फोन करने वाले तमाम बातें कर रहे हैं, लेकिन सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए जो कार्रवाई की जानी चाहिए, उसके नाम पर उन्हें सांप सूंघ जा रहा है। इस मामले के यदि लबुलुआब की बात करें तो अफसरों का रवैया पूरी तरह से लीपापोती भरा है। बकौल शिकायत कर्ता जहां तक वह समझ रहा है वो यह कि अफसर चाहते हैं कि शिकायत करने वाला यूटर्न ले लें। मसलन मामला होल्ड पर रहे और कार्रवाई की जहमत ना उठानी पड़े। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी अफसर कह चुके हैं कि जिस सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण की शिकायत की गयी है वहां अब जो हालात हैं, उनके चलते कार्रवाई मुमकिन नहीं। यह बात समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

यह है पूरा मामला

जनपद के हस्तिनापुर के गांव समसपुर में खसरा संख्या 254 सरकारी खाद गड्ढे की जमीन जिस पर अवैध कब्जे के की शिकायत मिलने के बाद तहसीलदार ने आरोपी को पंद्रह दिन के भीतर अवैध कब्जा हटाने के आदेश देते हुए बेदली के आदेश दिए थे। उन आदेशों के खिलाफ आरोपी पक्ष हाईकोर्ट से स्टे ले आया। हाईकोर्ट के स्टे की मियाद एक माह थी। स्टे की मियाद खत्म होने के बाद भी तहसीलदार कार्यालय बजाए बेदखली की कार्रवाई करने के हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। नतीजा यह हुआ कि खसरा संख्या 254 की सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जा करने वाला पक्ष दोबारा स्टे हासिल करने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गया। उसकी अर्जी पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारियों को पार्टी बनाते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है। यह जवाब तहसीलदार कार्यालय द्वारा दाखिल किया जाना है, लेकिन हैरानी इस बात कि है सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के नाम पर दो बार बेदखली का नोटिस संबंधित को जारी करने वाले हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब देने को अभी तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। हस्तिनापुर के गांव समसपुर में खसरा संख्या 254 सरकारी खाद गड्ढे की जमीन सरकारी कागजो में दर्ज है।

अवैध निर्माण की शिकायत की

समसपुर निवासी संजीव पुत्र ताराचंद ने उक्त जगह पर गांव के सतबीर पर कब्जा कर अवैध निर्माण की शिकायत की। इस शिकायत पर साल 2025 में तहसीलदार के यहां से सतबीर को बेदली का नोटिस थमा दिया गया। नोटिस के खिलाफ सतबीर हाइकोर्ट चला गया। वहां से उसको टाइम बाउंड यानि एक माह का स्टे मिल गया। बकौल संजीव स्टे की मियाद खत्म होने के बाद भी तहसीलदार कार्यालय बेदली की कार्रवाई नहीं कर रहा है। केवल इतना भर किया गया है कि दोबारा से बेदखली का नोटिस तसबीर को थमा दिया गया है। जबकि होना यह चाहिए था कि जब हाईकोर्ट से मिले नोटिस की मियाद पूरी हो गयी वह निष्प्रभावी हो गया तो तहसीलदार कार्यालय को पहल करते हुए बेदखली की कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। संजीव का आरोप है कि केवल नोटिस-नोटिस खेला जा रहा है और यह सारी कवायद केवल और केवल सतबीर के अवैध कब्जे को बजाए के लिए की जा रही है। तहसीलदार ने जब दोबारा बेदखली का नोटिस जारी किया तो सतबीर अब दोबारा भी हाईकोर्ट जा पहुंचा और स्टे के लिए अर्जी दाखिल की है। उसकी अर्जी पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है जो तहसीलदार को दाखिल करना है, लेकिन जवाब दाखिल करने में भी टाल मटोल की जा रही है। मामले की शिकायत तमाम स्तरों पर तथा शासन तक करने वाले संजीव ने बताया कि वह तहसील दिवस पर जिलाधिकारी से मिले थे और मामले की पूरी जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि जो खसरा नंबर कब्जाया गया है वह सरकारी संपत्ति है। सरकारी संपत्ति पर कब्जा हटाने में किस वजह से देरी की जा रही है। संजीव का कहना है कि वहां तहसीलदार भी मौजूद थे। डीएम ने तहसीदार से जवाब तलब किया, लेकिन तहसीलदार वो समझाने में सफल हो गए जो नहीं होना चाहिए। फिलहाल यह मामला अटका हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी हैरानी 67-1 के तहत सतबीर के पुत्र गौरव पर तहसीलदार के यहां मुकदमा लिखे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई ना किया जाना है। गौरव ने जमीन के इस टुकड़े को किसी नलनी नाम की महिला से क्रय किया दिखाकर रजिस्ट्री करा ली है। सबसे बड़ी बात तो यह कि सरकारी जमीन पर रजिस्ट्री कैसे किसी प्राइवेट महिला ने कर दी। यदि यह बात बाद मे अफसरों के संज्ञान में आ भी गयी तो उस पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। संजीव का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर केवल खेल चल रहा है। वहीं दूसरी ओर तसहीदार निरंजन सिंह का कहना है कि जिस जमीन को लेकर सारा विवाद है उस पर हाईकोर्ट का स्टे अभी भी है। हालांकि उसके बाद सीएम ऑफिस ने मामले का संज्ञान ले लिया है।
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