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Zee न्यूज के सुभाष चंद्रा पर FIR

Zee न्यूज के सुभाष चंद्रा पर FIR

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एफआईआर में सुभाष चंद्रा, वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक पंकज सुरोलिया, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक अमिश पांड्या, स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक राजीव ढोलकिया और अज्ञात लोक सेवक

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ज़ी (Zee) ग्रुप के फाउंडर और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ ₹1,322 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। याद रहे कि पिछले दिनों सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया था। यह कार्रवाई एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) की शिकायत पर की गई है। सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज फ्रॉड ब्रांच ने 31 अगस्त को यह मामला दर्ज किया है, जिसमें सुभाष चंद्रा को आरोपी नंबर-1 बनाया गया है। एफआईआर में सुभाष चंद्रा के साथ ही वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक पंकज सुरोलिया, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक अमिश पांड्या, स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक राजीव ढोलकिया और अज्ञात लोक सेवकों सहित अन्य को नामजद किया गया है। एक पखवाड़े पहले एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा के 22006 करोड़ (गारंटी सहित अन्य मामलों में) के लोन के बदले 6.5 करोड़ रुपये में दिवालिया मामला सेटल कर दिया था। विवाद बढ़ा तो पांच सदस्यीय एनसीएलटी ने उस फैसले पर रोक लगा दी थी। हालांकि चंद्रा की ओर से यह सफाई दी जा रही थी कि इसके अलावा अन्य देनदारों पर लगभग 15 हजार करोड़ की देनदारी बरकरार थी।

नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना (लोन फ्रॉड)

आरोप है कि साल 2018 में सुभाष चंद्रा की कंपनियों ने LICHFL से क्रेडिट सुविधाएं और लोन हासिल करने के लिए उनकी नेटवर्थ का फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर तैयार किया गया सर्टिफिकेट जमा किया था। उस दौरान उनकी नेटवर्थ करीब ₹59,113 करोड़ प्रमाणित की गई थी, जिसके आधार पर उन्होंने पर्सनल गारंटी दी थी। सुभाष चंद्रा पर अपने बयानों से मुकरने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि जब सुभाष चंद्रा के खिलाफ दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उन्होंने खुद एनसीएलटी (NCLT) के सामने माना कि उनकी वास्तविक नेटवर्थ इतनी नहीं थी। एलआईसीएचएफएल का आरोप है कि लोन लेने के लिए फर्जी आंकड़े दिखाए गए।

इतना भारी नुकसान

₹1,322 करोड़ से अधिक का नुकसान: इन लोन खातों के डिफॉल्ट होने के कारण सरकारी ऋणदाता (LICHFL) को ब्याज और अन्य शुल्कों को मिलाकर ₹1,322 करोड़ से अधिक का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। सीबीआई ने सुभाष चंद्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), धोखाधड़ी (Cheating), विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) और आपराधिक कदाचार की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

इन कंपनियों को लाेन

₹500 करोड़ का लोन वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। ₹480 करोड़ का लोन डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज और स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। सुभाष चंद्रा के अलावा इन कंपनियों के निदेशकों (जैसे पंकज सुरोलिया, अमिश पांड्या, राजीव ढोलकिया) और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों को भी इस प्राथमिकी में नामजद किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिकायत में सुभाष चंद्रा के विदेश भागने की आशंका भी जताई गई है।
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