यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा आला कमान ने आंतरिक सर्वे और फीडबैक के आधार पर लिया है निर्णय
नई दिल्ली। 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटों में हुई गिरावट (33 सीटों पर सिमटना) को लेकर पार्टी के भीतर आत्ममंथन और रणनीतिक बदलाव की स्थिति बनी है। यूपी विधानसभा चुनाव (2027) के लिए भाजपा अपने करीब 30% से 40% वर्तमान विधायकों (यानी लगभग 100 से 114 विधायकों) के टिकट काट सकती है। संगठन के गलियारों में चल रही खबरों के अनुसार, पार्टी के आंतरिक सर्वे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के फीडबैक के आधार पर यह रणनीति तैयार की जा रही है। आंतरिक सर्वे और एंटी-इन्कम्बेंसी के चलते माना जा रहा है कि कुछ मौजूदा विधायकों के प्रति लोकल स्तर पर जो नाराजगी सामने आई है, उसके बाद बड़े पैमाने पर टिकट काटे जाने की तैयारी है। टिकटों के उचित चयन और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल के लिए लगातार सीक्रेट सर्वे कराए जा रहे हैं ताकि समय रहते सभी कमियों को दूर किया जा सके। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) में भाजपा अपने लगभग 30% से 35% वर्तमान विधायकों के टिकट काट सकती है, लेकिन पार्टी ने अभी तक किसी भी विधायक के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आरएलडी अब भाजपा (NDA) के साथ गठबंधन में है, इसलिए भाजपा को अपने कोटे की कुछ सीटें आरएलडी के लिए छोड़नी पड़ सकती हैं, जिससे कुछ वर्तमान विधायकों के टिकट कटना तय माना जा रहा है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में विधायकों के नामों को उजागर नहीं किया गया है। वेस्ट यूपी में जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी उन सीटों पर अपना दावा ठोक रही है जहाँ जाट और किसान मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं (जैसे मेरठ की सरधना विधानसभा की सीट और मुजफ्फरनगर की कुछ सीटें)। इन सीटों पर भाजपा के वर्तमान या पूर्व विधायकों का टिकट कटकर आरएलडी के खाते में जा सकता है। जानकारों की मानें तो आला कमान ने आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टिकट चयन और चुनावी रणनीति तय करने में ‘फ्री हैंड’ (पूरी छूट) दिया है।
डेंजर जोन वाले विधायक
मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर जैसे क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली जिन विधानसभा सीटों पर 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पिछड़ गई थी, वहाँ के मौजूदा विधायकों के टिकट सबसे ज्यादा खतरे में हैं
इस वजह से कटेंगे टिकट
भाजपा सूत्रों ने बताया है कि संगठन नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी चुनावों में केवल जीतने की क्षमता (Winnablity) रखने वाले उम्मीदवारों को ही तरजीह दी जाएगी। टिकट फाइनल करने से पहले क्षेत्र में विधायक की छवि और जनता के बीच उनकी सक्रियता मापी जाएगी। कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने में ढिलाई। 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बदले राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के अनुरूप नए चेहरों की तलाश।
बागियों से निपटने की रणनीति
सुनने में आया है कि एक साथ इतने ज्यादा विधायकों के टिकट काटने से होने वाली संभावित बगावत और भीतरघात से निपटने के लिए भी भाजपा ने प्लान तैयार किया गया है। बताया गय है कि जिन कद्दावर विधायकों का अपने क्षेत्र में विरोध है, लेकिन उनका सियासी रसूख बड़ा है, पार्टी उन्हें किसी दूसरी सुरक्षित सीट से मैदान में उतार सकती है। जो विधायक बिल्कुल प्रभावहीन साबित हुए हैं, उनके टिकट पूरी तरह काटे जाएंगे और उनकी जगह युवाओं व नए चेहरों को मौका दिया जाएगा।
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